मंद मंद मकरन्द फूलों की बहार चली - घनाक्षरी छन्द

घनाक्षरी  छन्द 

मंद मंद मकरन्द फूलों की बहार चली,
सांस सांस महकी है खिला रोम रोम है।


भंवरों के गुंजन से जग सारा झूम रहा
पंछियों के कलरव से डोल रहा व्योम है ।


आज  उन्माद मे है, धरा सारी डोल रही
मानो सर्वत्र फैला, हुआ रस सोम है।


प्रेम की विराट लीला, चल रही पग पग
जीवन फूलों का भंवरों के लिये होम है ।


तारीख: 21.07.2020                                                        मोहित नेगी मुंतज़िर






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