मौत को करीब आ जाने दो

यादें उस शाम की रह गई

जब तुम्हारी खामोशियां भी बोला करती थी

हमारी यादों में तुम अब भी हकीकत हो

पर तुम्हारी हकीकत में शायद

हम एक फसाना बन कर रह गए

कभी तुम्हें दिल से चाहा था

आज खुद को तुम्हारी चाहत में डूबो दिया

मिलेंगे तुमसे एक दिन फिर

सब्र करो जरा मौत को करीब

बस आ जाने दो.....


तारीख: 25.05.2020                                                        वंदना अग्रवाल निराली






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