मीडिया और हम 

 

तटस्थ सूचना निष्पक्ष विश्लेषण

समय वो पीछे छूट गया 

दायित्वों से वचनबद्ध था 

चौथा स्तंभ वो टूट गया । 

 

सनसनी शब्द के मतलब बदले 

खबरों के चैनल की बाढ़ 

विज्ञापन में उलझे दर्शक 

ढूंढ रहे हैं ' समाचार ' । 

 

मूल्य तिरोहित करता जाता 

समाज का नुमाइंदा है 

ये प्रतिनिधि है धन कुबेर का 

मर्यादा बची ना ज़िंदा है ।

 

नतीजों की जल्दी है इनको 

मीडिया ट्रायल की होड़ है 

स्वयंभू जज बन करें फैसला 

न्यायपालिका गौड़ है । 

 

बयानबाज़ी और घोषणाओं के 

झूठ परोसे जाते हैं 

महिमामंडन है बाजारों का 

ग्रामीण उपेक्षित रह जाते हैं । 

 

प्रतियोगिता को रख पीछे 

पारदर्शिता को अपनाएगी 

तब ही मीडिया होगी प्रबल 

समाज का हित कर पाएगी । 

 


तारीख: 12.09.2020                                                        हर्षिता सिंह






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