नारी

 

इतनी अच्छी क्यूँ हो तुम
बचपन से ही सोचती सब का
कितना ख्याल रखती हो तुम
कोमल दिल पिघल जाता तुम्हारा
सबको अच्छी लगती तुम

दौड़ दौड़ कर करती काम
प्यार से सब को खाना खिलाती
खुद भुखी रह जाती हो तुम
कभी बच्चो का कभी पति का
माँ बाप का भी करती तुम
इतनी अच्छी क्यूँ हो तुम

जब कभी बच्चो को डांटती
रो पड़ती खुद ही जब
कितना प्यार छुपा है आंचल में
मालूम पडता बच्चो को तब
इतनी अच्छी क्यूँ हो तुम

सुना हो जाता है घर
जब कभी नहीं होती हो तुम
आ जाती घर में रौनक
जैसे ही आती हो तुम
इतनी अच्छी क्यूँ हो तुम

दिन रात भी नहीं देखती
थक जाती फिऱ भी
लगी रहती हो तुम 
हर समय चिंता करती सब की
बस नहीं करती अपनी तुम
इतनी अच्छी क्यूँ हो तुम

इतनी कोमल हो कर भी
कैसे सह लेती सब दुःख तुम
मुस्कुराती रहती हो हर पल
कोई न जान पाया अब तक
राज़ क्या है यह नारी का
बहूत ही अच्छी हो तुम
पर इतनी अच्छी क्यूँ हो तुम
पर इतनी अच्छी क्यूँ हो तुम


तारीख: 18.08.2019                                                        अनिता गुप्ता






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