टिकुला

 

एक जोड़े मे दो टिकुला,

झरोखे के पास ,पेड़ से लटका। 

मंजर,मिठास, भँवरे मिले,फल लगा ,टिकुला हरा।

मन में खिजां रस,

नज़र बचाकर झुरमुट बीच बढ़ा ,

अप्रैल की आँधी झुरमुट को सरका गयी,

 जोड़ा दिखने लगा सभी को।

 

लोगों के आँखों को हरा लगा,

मारा झुटका गिरा दिया,

टहनी से बूँद-बूँद दूध टपक रहा,

पत्थर से फोड़ा,चाटा- चटकारा,

आवाज़ दे किसी ने फटकारा ,

सरपट भागे लोगों का चप्पल वहीं पड़ा है।

क्षत-विक्षत मरा, टिकुला हरा  है।

 

पकने से पहले टपक चुका,

समाज की लपलपाती जीभ,चटोर मुख और स्वाद की खातिर खप्प  चुका ,

ज़ख्मी बीज, माटी में गड़ा पड़ा,

एक जोड़े में दो टिकुला  मरा है।

अखबार टीवी देख रहे लोगों से नन्ही बेटी पूछ रही-

टिकुला किसने तोड़ा,कहाँ गया टिकुला  हरा?


तारीख: 03.10.2020                                                        अनामिका अनु






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