तोहमतें

मुझपर तोहमत लगाने वाला 
कब का सो चुका था!
मैं उठा ,चुपचाप तोहमत 
उसी पर झाड़ी
और चल दिया !
तोहमत उसे दिखेगी
तो वापिस उठा लेगा वो,
दे देगा किसी और को ,
जिसके ऊपर कोई तोहमत
न लगाई होगी उसने कभी !
मेरा क्या है
मेरे पास तो पहले से ही 
कई तोहमते हैं ,
आखिर मैं भी अब 
कितनी तोहमतें संभालूं 
कितनी झाड़ूं,
कितनी ओढ़ूं
कितनी बिछा लूं ?
अब की सोचा है
तोहमतों को गिन कर तो देखूं,
ज्यादा हुई तो सेल लगा लूं
और कम हुई तो कुछ अपनों को बुलाकर
नई तोहमतों से घरबार सजा लूं !


तारीख: 09.07.2021                                                        सुजाता






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