अपनों का भी शुक्रिया

हम अपनी ज़िंदगी में रोज़ कई लोगों से मिलते हैं. जिनमे से कुछ परिचित होते है और कुछ अनजान. कभी कभी हमें इन लोगों से मदद लेनी पड़ती है और कई बार जाने अनजाने ही ये हमारी मदद करते है .. तो बदले में हमारे दिल से "शुक्रिया" निकलता है.

लेकिन अधिकतर देखा जाता है की हम अपने परिचित लोगों से दोस्तों और रिश्तेदारों को शुक्रिया नहीं कहते और सोचते है की "अपनों को कैसा शुक्रिया ?" ऐसा करना तो उनका कर्त्तव्य है.

यहीं हम बहुत बड़ी गलती कर जाते है. रिश्तों में शुक्रिया अदा करना हमारे प्यार को जताता है. अपनों को शुक्रिया बोलना प्यार का मूल मन्त्र है.

शुक्रिया अदा करने से सामने वाले को ख़ुशी मिलती है साथ ही आपके रिश्ते में मज़बूती आती है और प्यार भी बढ़ता है.

त्याग, करूणा और हमदर्दी के बिना कोई प्रेम मुमकिन है। इसलिए अपने करीबी से प्रदर्शित किया गया मामूली सा त्याग, हल्की सी करुणा और थोड़ी सी हमदर्दी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करें।

शुक्रिया, सख्त से सख्त व्यक्ति भी कोमलता से भर उठता है। इतना ही नहीं इसका असर और भी गहरा होता है। वह असर आगे फिर आपके लिए उससे भी बेहतर कुछ करने का मौका देगा।

शुक्रिया केवल औपचारिकता से नहीं बल्कि दिल से करना चाहिए, जिससे दोनों तरफ से सकारात्मकता बढ़ती है, आत्मविश्वास बढ़ता और रिश्ता भी मज़बूत बनता है.

जब अपने बॉस, शिक्षक, माँ-बाप, भाई-बहन, अन्य रिश्तेदार या दोस्त को आप उनके किसी सहयोग पर शुक्रिया व्यक्त करते हैं, उनका चेहरा कितना खिल उठता है।  उन्हें ख़ुशी तो मिलती ही है साथ ही अपनेपन का एहसास होता है.इसलिए जब भी आपका कोई करीबी आपके लिए चाहे कुछ भी करे उसे भी दिल से शुक्रिया करें.आपका शुक्रिया उनके दिल को छू जायेगा और आपके लिए उनके दिल में सम्मान भी बड़ जायेगा.


तारीख: 27.08.2021                                                        मंजरी शर्मा






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