माता-पिता बरगद के समान

माता पिता,विशाल बरगद के वृक्ष के समान है... जो चाहे फल ना दे सके पर उनकी छाया बहुत घनी है. उनका आशीर्वाद तपती धूप में शीतलता का एहसास देता है.

माता पिता ताउम्र अपने बच्चों की खुशियों के लिए ही जीते है, पूरा जीवन संघर्ष करके अपनी औलाद की सुख सुविधाओं को जुटाने की कोशिश में लगे रखते है. अपना ऐशो-आराम छोड़कर अपने बच्चो का ख्याल रखते है.

लेकिन जैसे जैसे बच्चे बड़े होते है और उनके साथ साथ माता पिता की उम्र बढ़ती है तो बच्चे उनके बुढ़ापे को बोझ समझने लगते हैं.

आजकल सफ़र में रास्ता पता करने के लिए जिस तरह GPS का प्रयोग करते हैं, ठीक उसी तरह माता पिता भी GPS का काम करते है.

माता पिता की बातों से बचपन लौट आता है. उनके अनुभव बहुत ही बहुमूल्य होते है जो जीवन के पग पग पर महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.

वे भी आपके परिवार का हिस्सा है. जीवन में कोई नया या बड़ा कार्य करने से पहले माँ-बाप से चर्चा जरुर करें. आप का ऐसा करना उन्हें अच्छा लगेगा, उन्हें लगेगा कि आप उनकी बातों को महत्व देते है.

उनकी पसंद ना पसंद का ख्याल रखना आपकी ज़िम्मेदारी है. कभी कभार उन्हें खाने के लिए हॉटेल ले जाए, या उनकी कोई फेवरेट मिठाई उन्हें लाकर दे. यकीनन आपको सुखद एहसास होगा.

बुढ़ापे की उम्र में अक्सर पेरेंट्स को बातें करना प्रिय लगता है. ऐसे में आपको जब भी समय मिले, एक फोन कर ले और उनका हालचाल पूछ ले.

हर महीने उनके स्वास्थ का चेकअप कराएं. उनकी छोटी सी छींक का भी ख्याल रखे. समय से उनकी दवाइयां उन्हें लाकर दे. आपके ऐसा करने पर माता पिता को ज्ञात होगा कि आपको उनकी चिंता है.

घर से बाहर निकलते समय उन्हें बताकर जाये, ऑफिस से समय समय पर उनका हाल चाल पूछते रहे, यदि आप घर लेट आने वाले है तो उन्हें सूचित कर दे ताकि उन्हें चिंता ना हो.

उन्हें अपनी तकलीफों और खुशियों में शामिल करे, ताकि वे खुद को आपसे जुड़ा हुआ महसूस करें.

अपने माता पिता को भावनात्मक सपोर्ट करे और उनकी भी तकलीफों के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण रखें.

माता-पिता की छाया में ही जीवन सँवरता है।


तारीख: 27.08.2021                                                        मंजरी शर्मा






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