प्रेम की भाषा

 

तुम्हारी चुप्पी मुझे अच्छी नहीं लगती।
फिर एक दिन, 
कहीं लिखा हुआ पढ़ा, 
" प्रेम की भाषा मौन है "

तबसे मौन रहकर, 
मैं तुममें प्रेम पढ़ने लगी। 


तारीख: 03.07.2020                                                        अदिति शंकर सिंह






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