अब- वो देखे अम्बर ऊपर

अब- वो देखे अम्बर ऊपर,
तब- वो करे इंगत एक तारा,

अब- वो देखे चाँद के पीछे,
तब- वो करे उंगली से इशारा,

जाने कैसा पागलपन है।
सुना है-
बिछड़ा था यंही, जमीं पर यारा।


तारीख: 20.05.2020                                                        अंकित मिश्रा






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