आज का मॉडर्न प्यार

आज वो फिर उसी जगह खड़ा था, शायद उसी कुर्सी के पास, जहाँ कभी उसकी दुनिया ही शायद उससे छूट गयी थी. कुछ भी तो नहीं बदला यहाँ, वोही पेंट है, अब थोडा थोडा उतर सा गया है, कुर्सी और टेबल उसी ढंग से आज भी रक्खी है जैसे उस वक़्त थी.

वो थोडा इधर उधर देखता है, कुछ भी तो नहीं बदला यहाँ, हाँ ! चेहरे बदल गए हैं, कभी इन चेहरों में हमारा भी एक चेहरा होता था और उसका भी.... उसका चेहरा... वो आज भी नहीं मिटा चाहें स्मृति से या पर्स से और अब तो मोबाइल में भी उसी की फोटो पड़ी है वाल पेपर के रूप में. नहीं कुछ बदला है, हाँ कुछ तो बदला है... बदला है उसका साथ जो अब नहीं है, उसकी झलक जो दिखती नहीं, उसकी ख़ुशी जो उसके चेहरे पे हंसी बनके थिरकती थी... हाँ बहुत कुछ बदल गया है. नहीं! ये तुम क्या बोल रही हो? तुम जानती हो न हम दोनों एक दुसरे से कितना प्यार करते हैं, और तुम अब कह रही हो की हम नहीं मिल सकते? ऐसा क्या हो गया, बोलो प्लीज... कुछ तो बोलो - इस आवाज़ ने उसकी तन्द्रा भंग कर दी, और वो उस तरफ देखने लग गया जहाँ से आवाज़ आ रही थी.

उसने देखा एक लड़का और दो लड़कियां बगल वाली टेबल पर बैठे थे लड़का उनमे से एक लड़की का हाथ पकड़ के बैठा था और बोल रहा था.

तुम कुछ बोल क्यूँ नहीं रही हो, क्या हो गया है तुम्हे - लड़के ने फिर कहा.

क्या बोलूं, बताओ क्या बोलूं मैं, ये की मैं अब तुमसे नहीं मिल सकती, ये की मैं जा रही हूँ कभी न वापस आने के लिए, या ये कहूँ की मेरी शादी होने वाली है, और ये देखो उस लड़के की दी हुई अंगूठी जो कल शाम ही को उसने मुझे पहनाई है, क्या बोलूं मैं तुम ही बताओ, बोलो - उस लड़की ने रुआंसा होते हुए और अपना बायाँ हाथ आगे करते हुए जिसमे की एक डायमंड की रिंग चमक रही थी दिखाई.

उस टेबल पे एक दम से सन्नाटा सा छा गया, उस लड़के ने अपना हाथ उस लड़की के हाथ से हटा लिया, अब उसकी नज़र बस उस अंगूठी पे टिक सी गयी. मैं भी एक दम से सन्नाटे में आ गया, मेरे दिमाग में कुछ पुरानी यादें ताज़ा हो आई, यही तो मंज़र तब भी था, किरदार बदले हुए थे बस उस लड़के की जगह मैं था, अंगूठी वाली लड़की की जगह वो थी और उसकी सहेली बगल में बैठी थी. यही तो उसने भी कहा था मुझसे, बस उसके हाथ में तब तक अंगूठी नहीं थी, लेकिन शादी तो उसकी भी तय हो गयी थी, सर्दियों के दिन थे लेकिन उसकी बात सुन कर मेरे माथे पर तब भी पसीने की बूंदे छलक आयीं थी, आती भी कैसे नहीं, वो मेरी ज़िन्दगी जो मांग रही थी, हमारे प्यार की दुहाई देकर उसने मुझसे मेरा प्यार ही मांग लिया था तब. दो पल तो मुझे समझ ही नहीं आया था जब उसने कहा था की ये हमारी आखिरी मुलाकात है.

क्या कह रही हो, ये कब हुआ, मुझे क्यूँ नहीं बताया, तुम ऐसा कैसे कर सकती हो? तुमने तो कहा था की हम अपने प्यार को अंजाम तक ले कर जायेंगे और तुम इसे बीच मजधार में छोड़ के जा रही हो? हाउ कुड यू दो दिस तो मी? - उस लड़के ने एकाएक उस लड़की के कंधे पे हाथ रख कर कहा. अब तक उस लड़के की आँख में आंसूं आ गए थे, अब तो एस अलग रहा था की वो बस रोने ही वाला है, मैं उस लड़के में शायद अपना अक्स देख रहा था, तभी वो लड़की बोल उठी - ओफ्फो, तुम भी न, बी प्रैक्टिकल जान, यु नो ना आई हेव फॅमिली प्रेशर ऑन मी, मैं अपने पेरेंट्स के अगेंस्ट नहीं जा पाऊँगी एंड थिंक प्रेक्टिकली हाउ वे विल मैनेज? न तुमको अभी कोई जॉब लगी है न ही अभी उम्मीद है.

वो लड़का और शायद में उस लड़की की ओर ऐसे देख रहे थे की बस... उस लड़के की मन:स्तिथी क्या थी मुझे नहीं पता पर मैं सोच में पड़ गया था और उन पलों में लौट गया था जब उसने मुझे ये कहा था... ये तो नहीं कहा था... उसके वो शब्द तो आज भी मैं नहीं भूल सकता, मुझे भूल जाओ प्लीज, मैं तुम्हारा साथ नहीं दे पाऊँगी, अपनी ज़िन्दगी मेरे बिना मत रोको, लाइफ में आगे बढ़ जाओ, मैं तुम्हारी तरह स्तरों नहीं हूँ, जानती हूँ तुम्हारे बिना खुश नहीं रह पाऊँगी बस एक सुकून तब मिलेगा जब मैं देखूंगी की तुम सही हो, अपनी लाइफ में आगे बढ़ चुके हो... प्लीज तुम्हारी एंजेल आज तुमसे आखिरी बार कुछ मांग रही है.. सोना क्या तुम इतना भी नहीं करोगे मेरे लिए.... और हमारा प्यार, उसका क्या, वो टाइम जो हमने स्पेंड किया, हमारी मेमोरीज, उनका क्या... मेरा क्या, व्हाट विल आई दो विधआउट यु. - उस लड़के ने उस लड़की से पूछा तो मेरा ध्यान फिर उनकी ओर चला गया.

क्या बातें कर रहे हो तुम यार, बी प्रैक्टिकल हम दोनों मिले वी फैल इन लव, वी हद अ गुड टाइम, नाऊ इफ लाइफ हैस स्टोर्ड समथिंग अदर फॉर अस सो व्हाई शुड वी नौट ट्राई इट? प्लीज जस्ट लेट उस गेट ओवर विथ दिस, आई हेव तो गो फॉर माय टचअप! - उस लड़की ने कहा.

प्लीज एक बार देख लो, मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ... प्लीज आई विल नौट बी एबल टू लिव विदोउट यु. - उस लड़के ने एक आखिरी कोशिश की.

ओह प्लीज, देखा तुमने ना समीरा, आई टोल्ड यु थिस वुड बे डिफिकल्ट, ही विल नौट अन्दरस्टैंड, ही इस ओल्ड स्कूल - आँखें नाचते हुए उसने अपनी दोस्त से बोला.

मैं फिर अपने वाकये पे आ गया, क्या मेरी एंजेल भी ऐसी थी, क्या मैं भी उसके लिए ओल्ड स्कूल था... नहीं वो तो खुद कितना रोई थी जब उसने दिए हुए मेरे गिफ्ट वापस किये थे, एक एक गिफ्ट को उसने अपने होटों से लगा के मुझे वापस किया था..वो ऐसी नहीं थी.. वो दौर भी ऐसा नहीं था. यु नो वॉट, आई ऍम गोइंग, प्लीज फॉरगेट मी, डोंट ट्राई तो कांटेक्ट मी, इफ आई विल गेट टाइम आई विल कांटेक्ट यु, यु नो टू रेमेम्बेर ठोसे ओल्ड डेज, ओके... सो आल ओवर आल गुड. चलो समीरा वी हेव ऍन अपॉइंटमेंट तो कीप.

बाय.... टेक केयर....- कह के वो चल पड़ी उसने पलट के देखा भी नहीं पीछे की क्या हाल है उस लड़के का बस वो चली गयी... मैं भी बैठे देख रहा था जाते हुए उसे, कैसे बार बार पलट कर देख रही थी वो जैसे की अपनी आँखों से दिल में तस्वीर उतार रही हो मेरी... कैसे छठपटा रही थी दुबारा पलट के मेरे पास आने को.....कितनी बेबसी थी उन आँखों में.....बयां नहीं हो सकता वो शब्दों में....ये कहाँ खो गया मैं...ये सब तो बीत चुका है लेकिन मैं उसकी मदद करूँगा, उस लड़के की इस गम के समय मैं साथ दूंगा..

ऐसा सोचते हुए मैं उसकी तरफ बढ़ने ही वाला था की उस लड़के के फ़ोन की घंटी बजी...कोई विदेशी गाने की धुन थी उसने झटके से फ़ोन उठाया और सुनने लगा, फिर एक दम से बोला.. यार ब्रेकअप हो गया, सही वेंट अवे, उसकी इंगेजमेंट हो गयी, सिक्स मंथ्स वेस्ट हो गए, इससे सही तो वो तेरी वाली की फ्रेंड थी, हाउ शी वास बिहाइंड मी. हे इस सही सिंगल.... पक्का... ओके आई विल मीट यु इन हाफ ऍन आवर. बाय!

इतना कह के वो लड़का उठा, मोबाइल जेब में डाला इधर उधर नज़रें दौड़ाई, अपना चश्मा पहना और चल पड़ा... बिना मुड़े और मैं....

मेरा क्या मैं तो बस अपनी जगह पे खडा आज के ज़माने का मॉडर्न प्यार देखते हुए फिर सोच में डूब गया... कौन सी सोच अरे वही वाली... जब प्यार का मतलब शिद्दत होता था, या यूँ कहो जब प्यार का कोई मतलब होता था....
 


तारीख: 09.06.2017                                                        आकाश जैन






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