आतिश-ऐ-इश्क

तू मुझे ऐसे भुला न दे 
मेरी वफ़ा को ऐसी सिला न दे।
ये दिल तो अभी तेरा है
तू नजरें किसी से मिला न दे॥

दिल को मेरे बेचैन न कर
मुझे ऐसे तू दगा न दे।
मेरी आिशकी को देख तो ले
यूँही मुझे भुला न दे॥

किसी और की तू हो न जा
मुझे आंसुओं मे डुबा न दे।                     
रूह भी तो ये तेरी है
मेरे रूह को यूँ सजा न दे॥

दिल मे तू ही है मेरे
दिल को ऐसे गिला न दे।
मेरी तरफ तू देख ले 
यूँही मुझे रुला न दे॥

वफ़ा से न तू खेल मेरे
मुझे दर्द ऐसे पिला न दे।
मेरा दिल तो आतिश-ऐ-इश्क है
कहीं ये तुझे जला न दे॥॥


तारीख: 21.06.2017                                                        आशुतोष






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