मोहब्बत

किसी के लिये मोहब्बत मज़ा तो
किसी के लिये मोहब्बत सज़ा है।
कोई गलत नहीं ,  सब की अपनी अपनी रज़ा है।
मुझसे किसी ने पूछ दिया, क्या है आपके लिये मोहब्बत
मैने कहा मेरे लिये मोहब्बत जीने की वज़ह है।

खुद को सजाने का नाम है मोहब्बत।
तन्हाई मे भी गुनगुनाने का नाम है मोहब्बत।
खुद मे ही खो जाने का नाम है मोहब्बत ।
महबूब के आंखों मे डूब जाने का नाम है मोहब्बत ।
जो काम किसी से भी ना हो,
वो भी काम कर जाने का नाम है मोहब्बत ।
सच कहूँ तो सब कुछ खो कर भी
दिल से मुस्कुराने का नाम है मोहब्बत ।

जात, धर्म से आजादी के लिये बगावत है मोहब्बत ।
आशिकों के लिये पूजा और इबादत है मोहब्बत ।
मोहब्बत कभी इन्तहां तो कभी इल्तज़ा है
कोई गलत नहीं बकी अपनी अपनी रज़ा है
किसी के लिए मोहब्बत मज़ा
तो किसी के लिये मोहब्बत सज़ा है।
मेरे लिये तो मोहब्बत जीने की वज़ह है।


तारीख: 19.09.2019                                                        राकेश कुमार साह






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