उदास पलों से दूर

हुआ ऐसा की मन डूबा था उदासी में और तुम याद आये,
तुम याद आये और कुछ धुंधली तस्वीरे साफ़ होने लगी |
आखिर क्या हुआ एक पल में ऐसा जो पहले ना हुआ था,
यूँ कैसे कोई ले गया उन उदास पलो से इतना दूर हमे |

हम तो सोचे थे कि हम एक बीता कल हैं तुम्हारा,
क्यों पीछा कर रहे हो इन यादों के दरमियाँ हमारा |
लगता है रह गए कुछ किस्से जिन्हें अधूरे छोड़ आये थे,
या ये हमारा स्वार्थ है जो तुम्हे कभी भूल ही नहीं पाए थे |

तुम आए थे हमारे बेरंग जीवन में इन्द्रधनुष बन कर,
जिसमे बरसात भी थी और उजाले की किरण भी |
कितनी तस्वीरों में रंग भरे हमने तुम्हारे उजालो से,
वो चेहरे जो कैद थे बरसो से परछाईयो के हवालो में |

यूँ तो बहुत वक़्त गुजर गया जब तुमने अलविदा कहा था हमसे,
हो गया वक़्त जब हँसते हँसते मूंह फेर गए थे तुम उस मोड़ पे |
उस मोड़ पे जहाँ आज भूले से भी कोई गुजरता नहीं,
तुम निकल गए बहुत दूर और ये मन आज भी वहीँ रुका है |

हम तो आज भी जी रहे है एक झूठी उम्मीद के सहारे,
कि आएगा एक दिन वो भी जब ये रूह फिर जी उठेगी |
इस काँटों भरे जीवन में प्यार की कली फिर खिल उठेगी,
शायद यही एहसास दिलाना था हमे जो तुम याद आये |
शायद ले जाना था हमे दूर उदासी से जो तुम याद आये |


तारीख: 20.06.2017                                                        पंकज वर्मा






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