तुम्हारी मोहब्बत या मेरी सजा

ये तुम्हारी मोहब्बत है या मेरी सजा, जो तुम अकेले में रो रही हो।
है तुम्हारी मासूमियत या मेरी किस्मत जो मेरे आँसुओं को अपने आँसुओं से धो रही हो।
मेरी खता है या रंजिश ज़िन्दगी की जो तुम्हारे गम में मैं शामिल नहीं हो सकता।
ये तुम्हारी शराफत है या तुम्हारी हया, जो मेरी न होकर भी सदा के लिए मेरी हो रही हो।

एक वो है जो मेरी होकर भी मेरी नहीं (तुम्हारी यादें)।
एक वो जो मेरा नाम लेकर मुझे रुलाती है (तुम्हारी बातें)।
एक वो है जो मुझे बहोत खुशियाँ देती है (तुम्हारी हँसी)।
और एक वो जो मुझे बहोत हँसाती है (तुम्हारी शरारतें)।
ये नादानी है तुम्हारी या तुम्हारी दीवानगी जो मेरी यादों को तुम यूँ सँजो रही हो।
ये तुम्हारी मोहब्बत है या मेरी सजा, जो तुम अकेले में रो रही हो।

एक वो है जो मुझसे बहोत प्यार करती है (तुम्हारी मोहब्बत)।
एक वो जो रो रोकर मुझे याद करती है (तुम्हारी सिसक)।
एक वो है जो खोकर भी मुझे पाना चाहती है (तुम्हारी ज़िद)।
और एक वो जो कहती है किसी और के हो जाओ (तुम्हारी इंसानियत)।
ये ज़िद है तुम्हारी या तुम्हारी बेकरारी जो यादों के सहारे तुम मुझमे खो रही हो।
ये तुम्हारी मोहब्बत है या मेरी सजा, जो तुम अकेले में रो रही हो।

एक वो है जो हर मुश्किल आसान कर देती है (तुम्हारी तलब)।
एक वो जो उदासी एक पल में दूर कर देती है (तुम्हारी मुस्कराहट)।
एक वो है जो मुझसे कुछ भी करवा सकती है (तुम्हारी खुशी)।
और एक वो जो दिल की बात कह नहीं पाती (तुम्हारी झिझक)।
ये तुम्हारी कसक है या तुम्हारी निष्ठा जो गम के धागों में अपने आँसू पिरो रही हो।
ये तुम्हारी मोहब्बत है या मेरी सजा, जो तुम अकेले में रो रही हो।


तारीख: 05.06.2017                                                        विवेक सोनी






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