कुछ छूट गया कुछ छोड़ दिया

कुछ छूट गया कुछ छोड़ दिया
किस राह पर तूने मोड़ दिया ए-जिंदगी।
बहुत कर चुका सब्र 
अब मेरे सब्र का इम्तिहान न ले ए-जिंदगी।।

राह जैसी भी थी मैं चलता गया
तेरे इशारों पर ढलता गया ए-जिंदगी।
अब कोई इशारा न कर
अब तो किनारे लगा ए-जिंदगी।।

कुछ अनकहे किस्से सुन 
कुछ हमारे दर्द की भी दवा कर ए-जिंदगी।
बहुत जी चुके बेपनाही में 
अब तो हमें फना कर ए-जिंदगी।।


तारीख: 07.12.2019                                                        विशाल गर्ग






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है


नीचे पढ़िए इस केटेगरी की और रचनायें