मेरी सांसों पे तेरा नाम लिखा

मेरी सांसों पे तेरा नाम लिखा
अब तुझको भुलाऊँ मैं कैसे ।

प्यार तुझी से करता हूँ
मैं रोज़ तुझी पे मरता हूँ
लाख करूँ कोशिश पर मैं
दुनिया से छिपाऊं मैं कैसे ।

मेरी सांसों पे तेरा नाम लिखा
अब तुझको भुलाऊँ मैं कैसे ।

हर रात ख़ाबों में आती है
इतना क्यू मुझको तड़पाती है
सामने तू है लेकिन सजनी
गले तुझको लगाऊं मैं कैसे ।

मेरी सांसों पे तेरा नाम लिखा
अब तुझको भुलाऊँ मैं कैसे ।

तू सबको अच्छी लगती है
दिल की सच्ची लगती है
फिर भी न जाने बात है क्या
तेरी मांग सजाऊँ मैं कैसे ।

मेरी सांसों पे तेरा नाम लिखा
अब तुझको भुलाऊँ मैं कैसे ।

न जाने कितना कतराती है
मेरे प्यार पे वो इतराती है
करती है प्यार मुझे कितना
दुनिया को बतलाऊं मैं कैसे ।

मेरी सांसों पे तेरा नाम लिखा
अब तुझको भुलाऊँ मैं कैसे ।


तारीख: 18.06.2017                                                        ऋषभ शर्मा रिशु






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है