फिर एक बार हमको ग़मों ने घेरा है

फिर एक बार हमको ग़मों ने घेरा है |
ख़ुशी से बैर है मुश्किलों का डेरा है ||

आँखों की चमक पल में हवा जो हुई |
होंठों की हँसी अब तो जुदा हो गई ||
राहों पे काँटे हैं नज़रों में अँधेरा है,,,,,,,,
फिर एक बार हमको.....................

मेरे लबों की ख़ामोशियाँ फ़ना हो गईं |
अब ज़ुबां की सरग़ोशियाँ कहाँ खो गईं ||
दिल में दर्द है अब ज़ख़्मों का बसेरा है,,,,,
फिर एक बार हमको.........................

मेरे कदमों से फासले इस दम बढ़ गये |
जैसे मेरे रास्ते सभी शून्य में बदल गये ||
बेदम है दम अब मुसीबतों का फेरा है,,,,,,
फिर एक बार हमको.........................


तारीख: 18.08.2017                                                        दिनेश एल० जैहिंद






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