भारत की बड़ी सफलता

कुछ मत्त्वपूर्ण तथ्य जिसे हम युवाओं को समझना आवश्यक है -कि पाकिस्तान में एक तबका बलूचिस्तान आजादी के नारे लगा रहा है।क्योंकि उन्हें उनकी इच्छा के खिलाफ पाकिस्तान में मजबूरन विलय किया गया था।

उनकी सभ्यता संस्कृति तबाह करने की हर संभव कोशिश आज भी की जा रही है।जबकि पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम को कश्मीर से 370 हटने की फिक्र है जिसे वो अंतरराष्ट्रीय मसला करार देते है। शायद उन्हें अपने ही देश के बारे में कम जानकारी है तभी इतिहास के पन्नो पर उनकी नजर नहीं गयी कि भारत पाक युद्ध के दौरन 93 हजार फौजियों को छोड़ते वक्त उनके प्रधानमंत्री ने दस्तखत किए थे कि जितने भी हमारे आपके मसले है वे अंतरराष्ट्रीय नहीं है बल्कि द्विपक्षीय है।इस वक्त्त पाकिस्तान का एकमात्र मकसद यही प्रतीत होता है कि किसी भी तरह कश्मीर के मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण किया जाए और सहानुभूति बटोरी जाए।जबकि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी यह बखूबी समझती है कि यह मसला भारत-पाक के बीच का द्विपक्षीय है।अभी सँयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भी पाकिस्तान की कूटनीतिक हार ही हुई है।

शायद उन्हे अभी भी जिन्ना की तरह ही गलतफहमी है कि जब तक कश्मीर को अपनी तरफ रखे-रखने का पाखंड करँगे तब तक पाकिस्तान की जनता उनसे विकास के बारे में कोई सवाल जवाब नहीं पूछेगी।

उन्हें लगता होगा कि पाकिस्तान जनता उनसे सवाल जवाब नहीं करेगी की हमारे बच्चो के लिए कायदे के स्कूल तक नहीं तो फिर वो आतंकवाद के पोषक नेताओं के बच्चे विदेशों में क्यों पढ़ रहे है।

पर वहाँ का मध्यवर्गीय तबका कश्मीर राग से ऊब कर अब देश मे रोज़ी रोटी स्कुल अस्तपताल जैसे बुनियादी मुद्दे पर बात करना चाहता है।

जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत का कदम पाकिस्तान और चीन दोनों देशों के लिए कड़ा संदेश है।और भारत के लिए बड़ी सफलता है।


तारीख: 09.09.2019                                                        राजकुमार सचदेवा






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