ना समझी

गलतियॉ थी अपनी
ना समझी थी अपनी
बातें थी अच्छी
पर लगी बुरी

     मेरा दिल लगाना
     हो गया अफ़साना 
     तेरे मेरे दरमियॉ
     अब रहा न कुछ

रह गया अकेला
मैं कोरा  कागज
न जाने किसने मिटाया
उन चन्द शब्दों को

   जिसे प्यार कहते हैं |
 


तारीख: 30.06.2017                                                        शिवम् सिहं शिवा






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