दीया

 

जला सको तो ;
जलाओ,
दीया ;
भीतर का,

जिस से कि -
आदि शक्ति माँ बाहू की डोरियां ,

यूं ही बन्धी रहें साथ  
और 
ऋषि श्रृंग की इस पत्थर -प्रतिमा से 
फुट पड़ें 
प्यार और आशीर्वाद के ,
ये दो शब्द आज -
"दुनिया बचे  "
 मिटे ये प्राकृतिक उत्पात ।
 
जला सको तो ;
जलाओ ,
दीया ;
भीतर का ,
जिससे कि -
शिव की जटाओं से अवतरित ,
वीरभद्र रूप ;
कांगलधिपति मूल  ,
पझारी महाराज बाहू मिटा बैठे ,
कोरोना काल की 
प्रलयंकारी दृष्यता  ।

जला सको तो ;
जलाओ  ,
दीया ;
भीतर का ,
जिससे कि -
प्रकट हो 
वो विभा ,कि -
इष्ट देव की टोह में ;
समस्त ,
दिव्य शक्तियों की छोह में ;
मानव जीते ,
कोरोना हारे  ,
अनैक्य में एेक्य का संकल्प लिए  
कहता हूँ मैं 
"सत्य" ,दीया भीतर का  ।


तारीख: 25.04.2020                                                        मोहिन्दर सिंह नदेड़ा






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