प्यार का पंचनामा

नमस्कार!


आप सबों ने मेरी किस्से-कहानियों को पढ़ा और मुझे सराहा भी। आप सभी 
के दिए सम्मान और अभिवादन से मैं काफी कृतज्ञ हूँ और आप सबका 
धन्यवाद करता हूँ। मैं काफी हर्षित और कृतज्ञ हुआ आप सबके स्नेह और
रूचि से। मैं ये नई कड़ी शुरू कर रहा हूँ आप सभी को अपनी ओर से 
धन्यवाद देने के लिए और इतने समय में जो कुछ भी सिखा है उसका 
एक हिस्सा आप सबों के साथ बाँटने के लिए।

कुछ दिनों पहले मुझे मेरे मित्रों ने पूछा , “तुम कहानियाँ लिखते हो पर 
आज के चलन में सबसे अधिक प्रेम कहनियाँ प्रचलित हैं। तुम कुछ प्रेम 
के विषय में क्यों नहीं लिखते?” मैंने उत्तर दिया कि प्रेम एक बेहद 
गहरा विषय है। मैं बाकी लेखकों के बारे में तो नहीं जानता पर किसी 
भी विषय के बारे में लिखने से पहले मैं उसे अच्छी तरह समझ लेना 
चाहूंगा। अब तक जीवन में किसी से कोई गहरा प्यार या प्रेम हुआ नहीं
है जिसके बारे में लिख सकूँ। (और जो कुछ भी इक्के दुक्के प्यार जैसे
अनुभव हुए हैं वो उतने रोचक नहीं हैं जिसे कोई दूसरा पढ़ने में दिलचस्पी 
दिखाए।)

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बातों बातों में एक ने सवाल पूछा, “तो क्या प्रेम के बारे में लिखने के 
लिए पहले प्रेम करना ज़रूरी है?” तभी मेरे एक करीबी मित्र ने बड़े ही 
भारी ह्रदय से कहा, "नहीं चाहे कुछ भी हो जाए किसी के सच्चे प्यार 
में कभी नहीं पड़ना। बड़ा ही गलत और दुःखदायी होता है। आज किसी 
पर भरोसा नहीं कर सकते। वो फ़िल्म नहीं देखी "प्यार का पंचनामा" 
उसमे सारी सच्चई बताई गई है। ऐसा ही होता है।" 

उसने खुल के बताया कि किसी समय में उसकी एक ‘गर्लफ्रेंड’ हुआ 
करती थी और जैसे-जैसे दिन बीतते गए चीज़े बिगड़ते गयी और एक 
दिन दोनों को अलग होना पड़ा। वो इस फैसले से खुश नहीं था पर 
उसकी गर्लफ्रेंड ने उसे छोड़ दिया। उसके साथ बहुत गलत किया और 
इसी वजह से वो उसे माफ़ नहीं कर सकता। उसने अब अकेले रहने 
का फैसला किया है। अब तक तो हमे लग रहा था कि वो मज़ाक कर
रहा है पर धीरे धीरे बातें बहुत संगीन हो गयी थीं। अच्छा नहीं लगा 
ऐसा सुनके कि मेरे ही एक दोस्त ने इतना कड़ा फैसला लिया है।

खैर हम ज़िन्दगी के बारे में कुछ कह नहीं सकते। बड़ी लम्बी होती है 
और हमारे फैसले बदलने में भी देर नहीं लगती। उसकी ज़िन्दगी तो 
जैसी भी हो चल जायेगी। पर एक बात जो गौर करने वाली है कि 
मेरे दोस्त की ही तरह बहुत से लोग हैं जो इस तरह की व्यथा से 
पीड़ित हैं। कोई एक या दो नहीं, ऐसे लोग बहुत से हैं। सभी हमारे 
आस पास ही हैं। ये आपको ‘गूगल’ पर ढूंढने से ही मिल जाएगा 
कि कितने लोग प्यार को गलत बताते हैं या प्यार में धोखा खाया 
हुआ बताते हैं और तो और अपने आप को हमेशा अकेला रहने की 
सोच लेते हैं।

अचंभित मैं इस बात से हूँ कि इसी देश में प्यार और मुहब्बत पर 
ढेरों काहानियाँ लिखीं गयी हैं। आज भी कभी विदेश में सिर्फ ‘रोमियो
जूलियट’ महशूर है पर हमारे देश में लैला मजनू, हीर राँझा, 
सोनी महिवाल और ना जाने कितनी ही अनगिनत प्रेम कहानियाँ हैं।
तो आज ऐसा क्यों हैं? 

ऐसा क्यों है कि आज का युवा प्यार में एक बार धोखा खाने पर 
दूबारा किसी और के सामने अपने आप को प्रस्तुत नहीं कर सकता?
क्यों वो एक बुरे अनुभव के बल पर किसी और को दूबारा मौका ही 
नहीं देना चाहता? क्या हम ज़रूरत से ज्यादा डर गए हैं? या कहीं 
हमसे ही रिश्तों को समझने में गलती होती है? शायद यही वजह 
है कि गत वर्षों में फ़िल्म, विज्ञापन या उपन्यास की दुनियाँ में 
ऐसे लोगों को सफलता मिली है जो प्यार का एक दूसरा रूप 
दिखलाते हैं। आए समय में किसी नायक की वेदना को देख कर 
दर्शकगण खुश हो जाते हैं, तो कभी नायिका के साथ हुए अन्याय 
पर सबके आंसू आ जाते हैं। हर युवा आजकल "प्यार का पंचनामा" 
और "लव का दी एंड" जैसी फिल्मों को और "इमोशनल अत्याचार" 
जैसे सीरियल के नाम दोहराता है। जिनमे प्यार और रिश्तों को 
गलत बताया गया है। हर उपन्यास में प्यार को हारा हुआ दिखाया
जाता है और लोग भी उसे पसंद भी करते हैं।

मैं कोई विशेषज्ञ तो नहीं पर अपने जीवनकाल में जो कुछ भी अब
तक देखा है वो आप सबके समक्ष रखता हूँ। मेरा विषय है "क्यों 
अधिकतर सच्चे प्रेमियों को असफलता मिलती है।"

मैं शुरुवात दो बातों से करना चाहूंगा। पहली ये कि आपको प्यार में
असफलता ढेरों वजहों से मिल सकती हैं – आमिरी-गरीबी, खानदान
की जंग, जात पात की समस्या, एक दूसरे की सोच का ना मिलना
और ना जाने क्या क्या जो फिल्मों में दिखाते हैं? मैं ये बात साफ़
कर देना चाहता हूँ कि मैं उन सभी कारणों के बारे में बात नहीं 
करना चाहता। वो सब हमारे सामर्थ के बहार हैं। हम उनका कुछ 
कर भी नहीं सकते। मैं यहाँ पर सिर्फ और सिर्फ दो मनुष्यों के बीच
हुई गलतफहमियों के बारे में उल्लेख करूँगा और ये बताना चाहूँगा 
कि सही समझ कर हम अक्सर क्या गलत करते हैं, जिनसे हमें 
असफलता मिलती है। बस थोड़े समय के लिए मान लीजिए कि 
आपके और आपके साथी के बीच कोई समस्या नहीं है सिवाय 
दोनों के बीच गलतफहमियों की।

दूसरी बात ये कि हम अक्सर आपने जीवन में घटित घटनाओं के 
लिए दूसरों को ज़िम्मेदार बताते हैं। हमेशा हमे लगता है कि हमने 
तो सब कुछ ठीक ही किया था फिर मेरे साथी (यानि गर्लफ्रेंड या 
बॉयफ्रेंड) ने मुझे क्यों छोड़ा। हाँ मैं यक़ीनन मानता हूँ कि आपने 
सब कुछ सही ही किया था। अगर आप इसे पढ़ रहे हैं तो शायद 
आपकी खुद की अपनी कोई कहानी होगी कहने को। बस आगे आने
वाली पंक्तियों को पढ़ते वक़्त ये सोच कर पढ़ियेगा कि हो सकता
है कहीं मेरे रिलेशनशिप (रिश्ते) के ख़त्म होने की वजह मैं भी 
हूँ। हो सकता है मैं कुछ बेहतर कर सकता था या थी। बस अनुग्रह
है कि अपने मस्तिष्क को संकीर्ण मत रखिए उसे खोल कर पढ़िए।
तभी मेरी बातें समझ में आएगी।

"क्यों अधिकतर सच्चे प्रेमियों को असफलता मिलती है।"

हम जब सच्चे प्रेमियों कि बात कर रहे हैं तो हमें ये जान लेना 
चाहिए कि ये वो बेहतरीन लोग हैं जो अपने साथी पर ढेर सारा 
प्यार और जिज्ञासा दखाते हैं। वो उन्हें दिलों जान से चाहते हैं और
उनके लिए हर कोशिश जी जान से करते हैं कि वो खुश रहें। 
ऐसो लोगों को हम “सच्चे प्रेमी” या “अच्छे साथी” के नाम से 
सम्बोधित करेंगे। पर उन्ही “सच्चे प्रेमियों” को एक दिन पता 
चलता है कि उनकी गर्लफ्रेंड किसी और लड़के को मन ही मन 
पसंद करने लगी है। वो लड़का जिसे वो पसंद करती है वो एक
फालतू, सबसे निठल्ला और आवारा किस्म का है। आप ये 
समझ नहीं पाते कि उसने इस लड़के में क्या देखा? मैं तो इससे
लाख गुना अच्छा हूँ।

या दूसरी तरफ आप वो लड़की हैं जिसने हमेशा कोशिश की अपने
बॉयफ्रेंड को खुश रखने। आपके बॉयफ्रेंड ने एक दिन आपको ऐसी
लड़की के लिए छोड़ दिया जो टाइट टी शर्ट और जीन्स पहनती 
है पर फितरत और बातों में एकदम घमंडी है। उसे ज़िन्दगी की 
‘अ-आ’ कुछ नहीं आता, उसके चाल चलन भी अच्छे नहीं हैं 
पर फिर भी आपका बॉयफ्रेंड उसके पीछे दीवाना है।

क्या वो सब पागल हो गए हैं? या दुनिया उलटी पुल्टी हो गयी 
है? ऐसा कुछ नहीं है। प्रकृति के कुछ नियम होते हैं जिनमें वो 
ताकत है जिससे एक बेकार से बेकार लड़का भी किसी को बहुत 
लुभावना लग सकता है और एक बेवकूफ से बेवक़ूफ़ लड़की की 
भी सबकी चहेती हो जाती है। वो कुछ ऐसे हैं।

1.    “सच्चे प्रेमी अपने साथी को इन्वेस्ट (Invest) नहीं करने 
देते”

जब हम किसी को बहुत ज्यादा प्यार और सदभाव दिखाते हैं। 
उनके लिए सब कुछ करते हैं, महंगी से महंगी चीज़े खरीद कर
देते हैं, उनके लिए घंटो इंतज़ार करते हैं ऐसा कर के हम 
उनमे इन्वेस्ट करतें हैं। इस प्रक्रिया में जब हम इतना समय और
श्रम लगाते हैं तो वो हमारे इन्वेस्ट करने का तरीका होता हैं। 
हम समझने लगते हैं कि वो इतनी खूबसूरत है, वो इतनी तेज़ 
है, मुझसे कहीं बेहतर है तो मुझे उसके लिए सब कुछ करना 
चाहिए। इसके बाद हम उन्हें और अधिक खुश करने की कोशिश 
करने लग जाते हैं। इससे उनकी एहमियत हमारी नज़र में बढ़ती
चली जाती है।

या बैंकिंग की भाषा में कहूं तो अगर आपका इन्वेस्टमेंट बढ़ रहा है तो 
आप उस वस्तु को और अधिक महत्व देने लग जाते हैं। उनके लिए 
अच्छी चीज़े खरीदना और उनके लिए कुछ भी करने की भावना आपको 
और अधिक कमज़ोर या ऋणी बनाती है। 

पर इसका उल्टा भी सच हो ये ज़रूरी नहीं। जिसके ऊपर आप इन्वेस्ट 
कर रहें हैं वो भी आपको उतना ही महत्व दे ये ज़रूरी नहीं। कई बार 
आप जो भी चीज़े कर रहे हैं अपने साथी के लिए (इस उम्मीद में कि 
वो आपको अधिक प्यार करेगा या करेगी) उसकी नज़र में आप बोझ, 
भोले और सिर का दर्द बन जाते हैं। मैं लडकियों के किसी एक पक्ष 
पर कोई ऊँगली तो नहीं उठाना चाहता पर कुछ लडकियों की नज़र में 
आप एक चलते फिरते ‘एटीम’ बन जाते हैं। और अगर आप लड़की 
हैं तो किसी लड़के को बार कॉल करने से आप उसकी नज़र में 'चेप' 
और 'बोर' जैसी संज्ञा पा जाती हैं।

कई बार जिनके लिए आप ये सब कर रहे होते हैं उन्हें तो ये मालुम 
भी नहीं होता कि ये सब आपने उनके लिए किया है। अगर आप किसी
 को कोई गिफ्ट दें या उनके खाने का बिल भरें तो उसे वो कभी 
मित्रता भी समझ सकते हैं। यहीं हमारे “सच्चे प्रेमी” या “अच्छे साथी”
पहली गलती कर बैठते हैं। वो प्यार को चीज़ो और पैसों से तोलने 
लगते हैं। जबकि ऐसा है नहीं। प्यार कभी खरीदा नहीं जा सकता। वो
बस जगाया जा सकता है।

इस प्रक्रिया को इकोनॉमिक्स में ‘संक कॉस्ट’ (sunk cost) या 
‘नल्ल इन्वेस्टमेंट’ (Null investment) के नाम से जाना जाता
है। जहाँ हम इन्वेस्ट तो करते हैं बिना उसका सही ग्रोथ (growth)
जाने। हम सपने ढेर सारे देख लेते है परन्तु बाद में पता चलता है 
कि कंपनी की ग्रोथ कभी हुई ही नहीं। इस वजह से हमे मुनाफा तो 
दूर अपना रियल इन्वेस्टमेंट भी वापस नहीं मिल पाता।

तो समझने वाली बात ये है कि अगर आपको किसी का प्यार पाना 
है तो उसे आपमें इन्वेस्ट करना होगा। तब जाके उसके दिल में आपके
 लिए कोई भी भावना पैदा होगी। जब भी आपके साथी आपके लिए 
कुछ भी करने को कहें - ना करिए। यकीन मानिए जिस दिन आप 
अपने ऊपर इन्वेस्ट करने लग जायेंगे या ये कोशिश करेंगे कि दूसरा
 आप पर इन्वेस्ट करे, आपकी एहमियत बढ़ेगी। हाँ ऐसा भी हो 
सकता है कि इसका उल्टा असर पड़े और वो आपको छोड़ कर चले 
जाएँ पर उस दिन कम से कम आपके पास आपका स्वाभिमान तो 
होगा और उसके जाने का ज्यादा दुःख भी नहीं होगा। क्यों? क्योंकि 
आपने इन्वेस्ट नहीं किया।

अब आप मुझसे पूछेंगे “तो क्या मैं जिससे प्यार करता हूँ उसके 
लिए कुछ न करूँ। आज अगर उसका जन्मदिन हो तो मैं उसे कोई 
अच्छा तोहफा भी ना दूँ?” नहीं दीजिए। ज़रूर दीजिए पर क्या उन्हें 
आपका जन्मदिन याद है और क्या वो भी आपको तोहफा देंगी या 
देंगे? वो भी आपके लिए घंटो इंतज़ार करने लिए तैयार हैं, क्या 
किसी दिन वो आपके खाने का बिल वो देने को तैयार हैं? अगर 
हाँ तो मुझे कोई समस्या नहीं। 

याद रखिए अगर इन्वेस्टमेंट दोनों तरफ से हो तो आप बहुत 
खुशनसीब हैं। आपको एक सच्चा प्यार करने वाला मिला है या 
मिली है। पर अगर सिर्फ एक तरफ से हो तो ऐसा रिश्ता एक 
की जेब को हल्का करता है और दूसरे के सिर का दर्द बन जाता 
है। अब जिस तरह की दुनिया में हम रह रहें हैं उसमे हमे दो 
या तीन मुलाकातों से ज्यादा नहीं लगेगा ये जानने में कि सिर्फ 
हम ही इन्वेस्ट कर रहे हैं या वो भी हम पर उतना ही इन्वेस्ट 
करने की इक्छा रखते हैं? जब भी आपको जैसा अंदाज़ा हो जाए 
वैसा कदम आप उठा सकते हैं।

2.    सच्चे प्रेमी बुरी बातों को भी सराहते हैं 

अक्सर आपने अपने करीबी दोस्तों को फ़ोन पे "बाबू", "शोना" 
और "जानु" जैसी बातों से अपने साथी को सम्बोधित करते हुए 
सुना होगा। ऐसे में मुझे काफी हंसी आती है। वास्तव में वो अपने
साथी को एक बच्चे की तरह महसूस कराते हैं। मैं इस तरह के 
बर्ताव को बहुत ही गलत मानता हूँ। इसकी एक वजह है (नहीं मैं 
कोई रूढ़िवादी सोच का व्यक्ति नहीं और ना ही किसी ‘धार्मिक 
राजनीतिकी पार्टी’ का समर्थक हूँ।)

हम सब अपनी परिस्थितियोँ से सीखते हैं। हमारे आस पास जो 
लोग हैं वो हमसे जैसी बातें करते हैं हम उसे समझ कर अपने 
बर्ताव में तब्दीली ले आते हैं। अतः ये बहुत ज़रूरी है कि हमसे 
वैसे ही बर्ताव हो जिसके लिए हम सक्षम हैं। किसी बच्चे की 
तरह नहीं। जब एक बच्चा कोई गलती करता है और हम उससे 
डाँटते या मारते हैं तो उसे ये बात समझ में आ जाती है कि 
हाँ मैंने कोई गलती की है और मुझे उसे दोहराना नहीं है। पर 
अगर उसी बच्चे को उसकी गलती पर भी हम उसे कुछ ना कहें
और उल्टा सराहने लग जाएँ, उपहार देने लग जाएँ तो बच्चा 
वही गलती बार बार करेगा। उसकी नज़र में वो गलती है ही नहीं।

हमारे ‘सच्चे प्रेमी’ ऐसा ही कुछ अपने साथी के साथ भी करते 
हैं। वो अपने साथी को इतना ख़ास मानते हैं कि कहीं वो छोटी 
सी बात पे नाराज़ ना हो जाएँ, ये सोचकर वो उन्हें कुछ भी 
कहने से कतराते हैं। इसमें वो उनकी गलतियाँ भी नहीं देखते। 
बल्कि यूँ कहूं तो उनकी गलतियाँ पे उन्हें और अधिक प्यार 
करते हैं। चाहे उसका मूड कितना ही खराब क्यों न हो, वो आपसे
चाहे कितने ही गलत तरीके से बर्ताव क्यों न करे। आप उनसे 
अच्छी तरह से ही बर्ताव करते हैं।

“चाहे उसका मूड कितना ही ख़राब हो मैं उसके लिए खाना 
बनाउंगी। या आज वो रूखे स्वर में बात कर रही थी मैं उसे फ़िल्म
ले जाउंगा” - ऐसी बातों से आप उसे बता रहे हैं कि अगर 
तुम्हे अच्छा डिनर या फ़िल्म जाना है तो फिर से बुरा बर्ताव करो
और तुम्हे मिल जाएगा।

यहाँ हमारे सच्चे प्रेमी और अच्छे साथी की कोई गलती नहीं है। 
वो बस ये चाहते है कि उनके साथी कभी नाराज़ न हों और हमेशा
खुश रहें। ऐसा सोचने में कोई बुराई तो नहीं है पर वो एक 
बहुत ज़रूरी बात भूल जाते हैं। कई बार जब कोई भी उदास या 
नाराज़ हो तो उसे अकेले रहने का दिल करता है। खुद आपके 
साथ भी ऐसा हुआ होगा। जब हम बुरी तरह खीज़ में भरे रहते 
हैं तो नहीं चाहते कि कोई भी हमे परेशान करे। चाहे वो हमारे 
कितना भी करीबी क्यों ना हो। ऐसे में जब आप अपने साथी को 
देखते हैं तो उन्हें अकेला छोड़ने के बजाय अपने आपको उनपर 
लादने लग जाते हैं तो कहीं का गुस्सा कहीं और तो निकलेगा ही।
 उनसे आपको दो बातें सुनने को मिलती है। पर इसके बावजूद 
आप अगर उन्हें और अधिक प्यार दिखाने लग जाएँ तो मन का
 बहकना लाज़मी है।

कई जगह पर मैंने ये देखा है कि किसी के बुरे बर्ताव के बावजूद 
भी उनके साथी उन्हें और अधिक खुश करने में लगे रहतें हैं। 
इसी आशा में कि एक दिन उनके साथी को उनकी एहमियत 
समझ में आएगी और उनकी इन सब बातों को सराहा जाएगा। 
एक गाल पे थप्पड़ तो दूसरा गाल भी बढ़ा देते हैं। 

पर ये मत भूलिए जब आप उस समय उनके गलत व्यवहार का
सही प्रतिउत्तर दें और उन्हें उनकी गलती का एहसास दिलाए 
तो आप न सीर्फ एक ‘अच्छे’ प्रेमी होंगी बल्कि एक ‘समझदार’
प्रेमी होंगे। आप उस वक़्त एक अलग रिश्ते की नीव रखेंगे 
जिसमे आप न सिर्फ रोमांटिक बातें करने के लिए बने हैं बल्कि
आप सही फैसले लेने के लिए भी सक्षम हैं। आप एक प्रेमी 
होने के साथ एक अच्छे दोस्त भी बन जाते हैं। A good 
guardian who is capable of taking the right
decision.

अंततः कभी भी किसी भी बुरे बर्ताव को शय मत दीजिए। उनकी
गलतियों को जल्द माफ़ ना करें। हमेशा उन्हें एहसास दिलाइए 
कि चाहे हम किसी भी तरह के सम्बंध में क्यों न हों सबसे 
अच्छा बर्ताव करना न ही ज़रूरी है बल्कि एक सामाजिक 
ज़िम्मेदारी भी है। (इस विषय में अधिक जानने के लिए एक 
बहुत अच्छी अंग्रेजी की कहानी पढ़ सकते हैं “On Saying 
Please”) किसी को कोई हक़ नहीं है कि कोई भी मुझसे कुछ
भी कह दे और मैं सुनता रहूँ। साथ ही आपका भी ये फ़र्ज़ 
बनता है कि जब वो आपसे कहें कि मैं अकेला रहना चाहती हूँ 
या चाहता हूँ तो उन्हें अकेला छोड़ दें। उन्हें भी उनकी आज़ादी दें।

ये बातें उन लड़कों को पता रहती हैं जिनके पीछे आपकी गर्लफ्रेंड
पागल हो जाती है या उन लड़कियों को भी पता रहती हैं 
जिनके पीछे आपके बॉयफ्रेंड दीवाने हो जाते हैं। उन्हें अपनी सीमा
कहाँ तक रखनी है 

इसका भली भाँती ज्ञान होता है। वो अपने साथ हुए किसी भी तरह के बुरे 
बर्ताव को न जल्द भूलते हैं और न जल्द माफ़ करते हैं। इसलिए शायद 
लोग उन्हें एहमियत ज्यादा देते हैं।

अब आप मुझसे पुछेंगे कि क्या हो गया अगर मुझसे मेरी प्रेमिका ने थोड़ी
ऊँची आवाज़ में बात कर ली तो या क्या हो गया अगर मेरे बॉयफ्रेंड ने 
मुझपे थोड़ा चिल्ला दिया। इतनी सी बात के लिए कोई घर में मिलिट्री 
(military) के नियम तो नहीं लागू कर देता। मुझपे तो हक़ है उनका। 

ज़रूर है। पूरा हक़ है उनका कि वो आप पर चिल्लाएं, आखिर आपने 
जीवन में एक कमिटमेंट दिया है साथ निभाने का। पर आप पर कितनी 
बार आवाज़ ऊँची की जा रही है - साल में एक बार, महीने में एक बार,
हफ्ते में एक बार या दिन में एक बार। क्या आपको नहीं लगता की 
अगर ये हर रोज़ का किस्सा हो तो आपको इसके बारे में कुछ करना 
चाहिए? और तो और अगर वो आपपे चिल्ला सकता या सकती हैं तो 
क्या वही आज़ादी आपको भी है? ऐसे सवाल के जवाब मैं आप पर 
छोड़ता हूँ।

3.    सच्चे प्रेमी ज़रूरत से ज्यादा अच्छे होते हैं

हमे बचपन से एक बात बताई गयी है "जिस चीज़ की कमी है वो 
महत्व्पूर्ण है।" और ये बात हर जगह लागू होती है। पानी कम है 
महत्व्पूर्ण है, कोयला कम है महत्व्पूर्ण है, खनिज कम है महत्व्पूर्ण है। 
ये बात इंसानो पर भी लागू होती है "अच्छे इंसानो की कमी है इसलिए
वो महत्व्पूर्ण हैं" बस यही वाक्य हमारे हर निर्णय में टांग अड़ा देता है 
और हम अक्सर गलती कर बैठते हैं।

हाँ वाकई अच्छे इंसानो की कमी है पर ये समझना ज़रूरी है कि हर 
इंसान के लिए अच्छे इंसान की परिभाषाः बदलती है। कई बार हमने 
महसूस किया होगा कि कुछ लोग जिनके बारे में हम ज्यादा जानते भी 
नहीं वो हमे अच्छे लगने लग जाते हैं और कुछ लोग जिन्होंने हमारे साथ
कुछ बुरा नहीं किया पर फिर भी हमें उनकी शक्ल ही नहीं भाती और 
हम उन्हें ज्यादा पसंद नहीं करते। वस्तुनिस्ठ बातें नहीं करूँगा पर ये सच
ही है कि हमारे लिए अच्छा और बुरा इंसान समय और परिस्थिति पर 
निर्भर करता है।

परन्तु हमारे सच्चे प्रेमी इस धारणा पर कि "अच्छे इंसानो की कमी है" 
लगे रहते हैं और अपने आप को अच्छा साबित करने की कोशिश करते 
हैं। वो अपने प्रेमी / प्रेमिका के लिए हर भरसक प्रयास करते हैं अच्छा
बनने की। अपनी स्कूल और कॉलेज में बंक करना, माता पिता से 
झूठ बोलना, और यहाँ तक की काम को छोड़ कर उनसे मिलने आना। 
हर तरह से उनकी सेवा में हाज़िर रहना। देर रात को भी उनको घर 
तक छोड़ना। उनको अपना प्यार दिखाने के लिए कुछ भी कर करते हैं 
अर्थात जीवन में सिर्फ प्यार ही करते हैं। ऐसे लोगों के लिए जीवन में
कुछ रह जाता है तो सिर्फ प्यार।

ऐसी स्थिति में जो उनका नियम था "अच्छे इंसानो की कमी है" गलत 
साबित हो जाता है। वो कोशिश तो कर रहे थे एक अच्छे इंसान बनकर
 अपने आपको महत्व्पूर्ण बनाने की परन्तु अंत में वो सिर्फ मामूली बन 
जाते हैं। वो कभी महत्व्पूर्ण नहीं कहलाते बल्कि चम्पू, अकेला और 
पागल कहलाते हैं।

मैं जानता हूँ कि ये गलत है पर ऐसा ही होता है। दूसरी तरफ वो लड़के
या लड़कियाँ जो हर प्लान cancel करते हैं। जो हर जगह लेट से 
आते हैं। जिनके लिए लोग इंतज़ार करते हैं वो किसी का इंतज़ार नहीं 
करते। ऐसे लोग आपके बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड को ज्यादा अच्छे लगते हैं।

मैं फिर कहूंगा ना आपका बॉयफ्रेंड बुरा है और ना आपकी गर्लफ्रेंड बुरी 
है वो बस एक मनोवैज्ञानिक तरीके का शिकार हैं। जिसमे उन्हें वो पसंद
आता है जिसे पाने में तकलीफ होती है। 

तो क्या करें?

अब सवाल ये आता है कि करें क्या? हम भी क्या उन लड़कों की तरह 
बन जाएँ जिनके चरित्र उनकी जीन्स से भी छोटा है? क्या हम भी किसी
को एहमियत न दे सिवाय हमारे? और लड़कियाँ पूछेंगी कि हमें भी 
उन लडकियों की तरह बन जाना चाहिए जिसके लिए किसी लड़के को 
घुमाना एक मैगी बनाने जितना आसान है। हमे भी क्या वही ट्रिक्स और
टिप्स अपनाने चाहिए? मतलब अगर हम जीवन से एक अच्छा रिश्ता
चाहते हैं तो हमें ऐसी ही कुछ बकवास बातों को मानना पड़ेगा?

नहीं बिल्कुल नहीं हर कोई वैसा हो भी नहीं सकता। और आपको किसी 
और की तरह बनने की ज़रूरत नहीं। हम सबकी कहानी अलग लिखी 
हुई है। हर लड़का ‘सिक्स पैक बॉडी’ नहीं बना सकता और हर लड़की 
‘ज़ीरो साइज़ फिगर’ नहीं रख सकती।

वैसे समस्या जितनी मुश्किल है निदान उतना ही आसान। आप चाहे 
लड़का हो या लड़की, किसी के साथ रिलेशनशिप में हो या नहीं, अगर
हो तो वो आपके साथ कैसा है, अच्छा है या बुरा है? वगैराह वगैराह 
बातें भुला कर सबसे पहले अपने जीवन में ध्यान दें। एक दिन बस एक
दिन के लिए सब कुछ भुला कर आपकी नौकरी, आपका कर्म, आपके
सपने क्या हैं इन सब बातों के बारे में सोचिए। आपको क्या अच्छा 
लगता है - बारिश में भीगना, मसालेदार चाट खाना, डूबते हुए सूरज
को देखना और दोस्तों के साथ मस्ती करना। इन सब बातों को एक 
दिन बिना किसी बंधन के कर के देखिए। अगर इन सब चीज़ों का लुफ्त
आप अकेले ज्यादा उठाते हैं बजाय की अपने साथी के तो समझ जाइए
कि आप एक गलत रिश्ते में हैं। तुरंत वो बंधन तोड़ कर वहाँ से 
निकालिए।

बस कुछ दिन अपनी जिंदगी में एक मतलब ढूंढने की कोशिश कीजिए। 
आपको क्या अच्छा लगता है, आप जीवन में क्या करना चाहते हैं और
आगे क्या करेंगे। क्या आपके कोई सपने हैं और अगर हैं तो उन तक 
कैसे पहुँचना है। इन सब के बारे में गहराई से सोचिए और जी जान से
इसके पीछे लग जाइए। मैं सच कहता हूँ आपको बहुत सुकून मिलेगा।
याद रखिए जिस इंसान के पास कोई लक्ष्य नहीं वो बस उस औंधे घड़े
की तरह है जिसमे बरसात में भी पानी नहीं होगा।

इससे दो फायदे होंगे, पहला आपको अपने बारे में कुछ गहन सच्चाईयों 
का पता चलेगा। आपको समझ में आएगा कि किसी की भी ज़िन्दगी 
किसी एक मनुष्य पर निर्भर नहीं हैं। हम सब के पास जब तक जीवन 
है कुछ न कुछ करने को है। चाहे हम अकेले रह कर करें या किसी के 
साथ। आपको “मैं” शब्द का सही अर्थ पता चलेगा। आपको अपने जीवन
का लक्ष्य मिलेगा जो कि दुनिया में बहुत से लोगों को सारी उम्र निकल
जाने पर भी नहीं पता लग पाता।

दूसरा फायदा ये होगा कि आप ये समझ पाएंगे कि दुनिया में कितना 
कुछ है सिवाय प्यार के और सच में किसी चीज़ को संकल्प कर उसे 
समाप्त करना कितना मुश्किल है। कितना मुश्किल है पैसे कमाना और
कितना मुश्किल है अपने लक्ष्य को पूरा करना। कितना कीमती है मेरा 
समय जिसे मैं अब तक वयर्थ करता आ रहा था। ‘जब जीवन में इतनी
सारी चीज़े मुश्किल हैं तो सच्चा प्यार भी इतनी आसानी से कैसे मिल 
सकता है?’ आपकी समझ में ये ज़रूरी बात आ जाएगी और आप छोटी
छोटी चीज़ों को अधिक महत्तव देने लगेंगे।

मैं सभी लड़कियों को सम्बोधित करते हुए कहता हूँ कि कभी भी उस 
लड़के को अपने जीवन में जगह मत दीजिए जो सिर्फ आपके लिए पागल
हो। जो इंसान अपनी जिंदगी से commited नहीं वो आपसे भी नहीं 
रहेगा। ऐसे लड़के के लिए आप बस एक excitement हैं आज हैं तो
कल नहीं रहेंगी। वो आपसे प्यार नहीं करता।

एक सच्चे इंसान की जिंदगी में उसका प्यार तीसरे नंबर पे आना चाहिए।
पहले वो खुद, ज़रूरी है कि वो पहले अपने आपको समझे तभी वो 
किसी और के लिए कोई जगह बना पायेगा। दूसरा उसका काम यानी 
लक्ष्य जिसके लिए वो पूरी तरह से कार्यरत हो। और तब प्यार या आप।
मैंने प्यार को तीसरा दर्जा दिया ये समझ कर आप दुखी न हो। याद 
रखियेगा एक तुलसीदास भी अपनी पत्नी से बहुत ज्यादा प्रेम करते थे।
परन्तु क्या वो वाकई प्रेम था? खुद तुलसीदास ने अपने शब्दो में अपनी
पत्नी को सिर्फ एक आसक्ति कहा है। कुछ करने को नहीं था इसलिए 
बहुत आसक्ति से भरे थे। 

आपको भी मेरी यही सलाह है "प्रेम करिए टाइम पास मत करिए।" 
क्योंकि सबसे अहम् वस्तु जिसे हम कभी अनजाने में भी खर्च नहीं 
करना चाहेंगे वो है समय। इसकी कीमत पहचानिए।

एक और बात, हम अक्सर जीवन में घटित घटनाओं के अनुसार अपनी
सोच को बदलने के लिए सहारा बाहरी दुनिया से लेते हैं। उदहारण के 
तौर पर जब आप सोलह-सत्रह की उम्र में थे तो प्यार के प्रति जिज्ञासा
थी। ऐसी स्थिति में आप खुद ब खुद "लव स्टोरी", "अ मोमेंट टू 
रेमेम्बेर", "द नोटबुक" जैसी प्यार की कहानियाँ पढ़ने लग जाते हैं या 
रोमांटिक फिल्मे हमे अधिक भाने लग जाती हैं। लेकिन उम्र के एक पड़ाव
में आगे चल के जब हमे धोखा मिलता है तो हम सब भूल कर 
उदासीन गाने सुनने लग जाते हैं और "प्यार का पंचनामा" जैसी फिल्मो
को अच्छा और सही बताने लग जाते हैं। दोनों ही स्थिति में हम अपने 
भीतर हो रहे मानसिक विवाद को सही बताने के लिए दुनिया का सहारा 
लेते हैं। जो दोनों ही सूरतों में गलत है। "लव स्टोरी" जैसे कहानियाँ उस
वक़्त भी थीं जब आप प्यार में धोखा खाए हुए थे पर तब आपने उस 
कहानी को नहीं पढ़ा। साथ ही आने वाली जनरेशन के पास भी "आई हेट
लव स्टोरी" जैसी कहानियाँ या उपन्यास होंगे पर कोई पढ़ेगा नहीं जब 
प्यार में पड़े हों। हम किसी भी चीज़ का वो पहलु देखना पसंद नहीं करते
अगर वो हमारे अनुकूल ना हो।

कृपया अपनी इस प्रेम कहानी को किसी उपन्यास या फ़िल्म के अनुसार 
ढालने की कोशिश मत कीजिए। (जो की आजकल युवाओं में बहुत 
प्रचलित है) ये सब सिर्फ किसी भी चीज़ का एक पहलु दिखाते हैं। 
जबकि सच तो ये है कि हमारी ज़िन्दगी में जो भी हो वो बहुत हद तक
हम पर निर्भर करता है। याद रखिए आपकी अपनी एक ज़िन्दगी है और
सब कुछ आप तय कर सकते हैं कि इसमें क्या हो। 

आशा करता हूँ आप सभी का जीवन सुखमय और पूर्ति से भरपूर हो। 
पढ़ने का धन्यवाद…


तारीख: 08.04.2014                                                        प्रिंस तिवारी






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