जिन्दगी के रंग मेरी कलम से

माना कि तजुर्बा इतना नही अभी
कि बयां कर सकूँ जिन्दगी के हर रंग
लेकिन तजुर्बा इतना भी कम नही
कि लिख न सकूँ जिन्दगी के दो चार रंग


बहुत खूबसूरत है ये जिन्दगी यारों
जीने के लिए बस खुशनुमा नजरिया चाहिए
हम बहुत खुश है या हमसे बहुत खुश हैं
दोनों में किसे चुनें बस इतनी सी समझ का जरिया चाहिए


खिलते फूल को देखकर खुश हो या तोड़ कर खुश हो
बस इस अन्तर को समझनें का नजरिया चाहिए
किसी को तन सुन्दर लगता है किसी को मन सुन्दर लगता है
असल में सुन्दर क्या है इसे पहचान लो और क्या चाहिए


खुद ज्यादा खाकर देखो या उसमें से किसी भूखे को खिलाकर देखो
असली खुशी का मजा किसमें है कम से कम इसे आजमाँ कर तो देखो
बच्चों की शैतानियों में जो रूठ जाते हो तुम
कभी उनकी शैतानियों में जिन्दगी का मजा उठाकर तो देखो


वृद्ध माता-पिता हो या दादा-दादी
उनको बस आपका थोड़ा सा समय चाहिए
दो पल ही सही उनके साथ भी थोड़ा गुनगुनाकर कर तो देखो
जिन्दगी बहुत खूबसूरत है सबके लिए
तुम बस बेवजह खुशियाँ बरसा कर तो देखो
माना बात पुरानी है लेकिन पते की है
तुम बस इन बातों को अपना कर तो देखो।


तारीख: 01.08.2017                                                        स्तुति पुरवार






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