छोड़ चम्पा चमेली नहीं आएगी

छोड़ चम्पा चमेली नहीं आएगी ।
ये समझ में पहेली नहीं आएगी ।।
आएगी तो ये दर्दो के झोंके लिए ,
ये ख़ुशी है अकेली नहीं आएगी ।।१

जाने क्या कह दिया जाने क्या सुन लिया।
ख़ुद ही ख़ुद में न जाने ही क्या गुन लिया।।
फूल  पाने  की   चाहत  में  हम  दोनों  ने ,
अपने  हिस्से  में काँटो  को ही चुन लिया।।२

ख़्वाब को दिल  ही  दिल में सँजोते हुए ।
जाने क्या मिल रहा ख़ुद को खोते हुए ।।
इस  विरह  की  हमारी   ये  तस्वीर  है ,
हँस  रहे  हैं  मगर   हम  तो  रोते हुए ।।३

हर घड़ी कहते रहने से क्या फ़ायदा।
पीर अपनी ही सहने से क्या फ़ायदा।।
पढ़ सके जो न नयनों की भाषा उसे ,
शब्द अधरों के कहने से क्या फ़ायदा।।४
 


तारीख: 23.08.2019                                                         देव मणि मिश्र






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