ईँट


देखो जब तुम मंदिर बनाना
तो श्री राम-चरित की हर ईंट लगाना !


इक ईंट हो राम जैसे पुत्र भाव सी
जो संतान को मात-पितृ मान सिखा दे !


इक ईंट हो राम जैसे विश्वास भाव सी
जो सबको सर्वधर्म समभाव सिखा दे !


इक ईंट हो राम जैसे सदाचार भाव सी
जो हर रिश्ते का मान और आन बढ़ा दे !


इक ईंट हो राम जैसे परोपकार भाव सी
जो हर निर्बल को सबल बना दे !


इक ईंट हो राम जैसे दया भाव सी
जो हर  प्राणी पर प्रेम बरसा दे !


इक ईंट हो राम जैसे त्याग भाव सी
जो हर लोभ-क्षोभ मन से मिटा दे !


इक ईंट हो राम जैसे क्षमा भाव सी
जो हर गुनाहगार को अभय दान दे !


इक ईंट हो राम जैसे ज्ञान भाव सी
जो हर अंधकार को प्रकाशपुंज बना दे !


इक ईंट हो राम जैसे कर्मठ भाव सी
जो प्राण जाए पर वचन न जाने दे !


तारीख: 06.04.2020                                                        सुजाता






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