हनुमान जी के मैनजेमेंट मंत्र

आज हनुमान जयंती के मौके पर,  हम आपके सामने उनके जीवन के मैनजमेंट मंत्र लाए हैं जो आपको बहुत कुछ सिखाएंगे और आपको साहस एवं उत्साह से भर देंगे |

(1) लक्ष्य को लेकर साफ दृष्टिकोण:-
हनुमान जी, श्रीराम के सच्चे मित्र थे, उनके हृदय में राम और सीता थे | वे अपने लक्ष्य को लेकर साफ थे, इसलिए वो  भगवान राम के सच्चे भक्त थे |

(2)जिम्मेदारी का भाव:-
वो जिम्मेदार भी बहुत थे, उन्हें कोई भी काम सौंपा जाता था, तो वे उसे पूरी निष्ठा से करते थे | जब उन्हें संजीवनी बूटी लेने के लिए भेजा गया, उन्होंने एक भी मिनट व्यर्थ न करते हुए उस ज़िम्मेदारी को लिया और पूरा करके दिखाया|

(3)प्रसन्नचित्त व्यक्तित्व:-
वो एक प्रसन्नचित्त व्यक्तित्व थे, इसलिए कैसी भी परिस्थिति हो, वे हमेशा प्रसन्न रहते थे, जब सभी दुखी हो जाते थे, फिर भी वे प्रसन्न रहते थे |

(4)काम को स्वयं पूरा करना:-
वो सारे कार्य स्वयं करना पसंद करते थे, इसलिए जब संजीवनी बूटी लाते हुए, उन पर भैया भरत ने वार किया, और जब भैया भरत ने जाना, कि ये तो कोई राम भक्त जान पड़ते हैं और जब उन्हें उनके बारे में पता चला, तब उन्होंने भैया भरत की मदद न लेते हुए खुद कार्य को पूरा करना ही उचित समझा, क्योंकि वे जानते थे, कि इस जीवन में जो स्वयं सारे कार्य करके दिखाता है वही सच्चा युद्धा होता है |

(5)निर्भीक व्यक्तित्व:-
हनुमान जी में भय लेश मात्र नहीं था, क्योंकि जब उन्हें लंका भेजा गया, तब अगर कोई उनकी जगह होता, तो डर से काँप जाता, किंतु वे बिना भयभीत हुए, सीधे लंका की ओर चल दिए और माता सीता का पता लगाकर ही वापस लौटे |

(6)अनुशासन का महत्व:-
वे अनुशासन के भी धनी थे, वे चाहते थे, तो एक बार में लंका को पूरी तरह से समाप्त कर सकते थे, और माता सीता को सीधा अपने साथ ला सकते थे, लेकिन उन्होंने आज्ञा और अनुशासन के महत्व को समझते हुए ऐसा नहीं किया |

(7)आज्ञकारी व्यक्तित्व:-
वे सही आज्ञा को लेकर, आज्ञकारी भी थे | कोई भी काम हो, वे उसके लिए कभी न नहीं कहते थे और उनकी यही बात उन्हें औरों से अलग बनाती थी |

(8):-अनुकूलन का भाव:-
उनमें अनुकूलन की क्षमता गजब थी, वे परिस्थिति के हिसाब से खुद को बदल लेते थे और जो लोग इस नियम का पालन करते हैं, वे कभी असफल नहीं हो सकते |

(9)संयम:-
हनुमान जी का जीवन संयम से भरा हुआ था, उन्होंने ने ब्रह्मचर्य का पालन पूरी निष्ठा से किया है और वे कभी अपने सयंमित जीवन से दूर नहीं हुए, तभी वे आज भी कलुयग में हमारे बीच उपस्थित हैं |


तारीख: 12.04.2020                                                        अनुराग मिश्रा






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