प्यार हो तुम मेरा

प्यार हो तुम मेरा, तुम मेरी प्रीत हो।
उम्र भर गुनगुनाऊँगा, वह गीत हो।।

अधखिले फूल जैसे तुम्हारे अधर।
दो चपल ये नयन जैसे गुंजित भ्रमर।।
प्रेरणा तुम मेरी, मेरे मनमीत हो।
उम्र भर गुनगुनाऊँगा, वह गीत हो।।

भावना तुम मेरी, तुम मेरी कल्पना।
रात-दिन मैं तुम्हारी करूँ चिन्तना।।
भाव हो तुम मेरा, तुम मेरा गीत हो।
उम्र भर गुनगुनाऊँगा, वह गीत हो।।

घुँघरुओं की खनक है तुम्हारी हँसी।
पक्षियों की चहक है तुम्हारी हँसी।।
रागिनी तुम मेरी, तुम ही संगीत हो।
उम्र भर गुनगुनाऊँगा, वह गीत हो।।

चाँदनी की तरह है तुम्हारा मिलन।
पूर्णिमा हो, अमावस का हो तम गहन।।
तपते मरु में रुचे, वह लहर शीत हो।
उम्र भर गुनगुनाऊँगा, वह गीत हो।।

साथ मेरे हो तुम पीर में हर्ष है।
जीत जाऊँगा जीवन जो संघर्ष है।।
तुम सफलता मेरी, तुम मेरी जीत हो।
उम्र भर गुनगुनाऊँगा, वह गीत हो।।
 


तारीख: 22.06.2017                                                        डॉ. लवलेश दत्त






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है