जीवन की किताब

 

जीवन एक खुली किताब सा लगता है 
हर पलटता पन्ना नया प्रभात सा लगता है
जुड़ रहे पृष्ठ दर पृष्ठ नये किस्से कहानी 
जीवन अब एक उपन्यास सा लगता है
जीवन एक खुली किताब सा लगता है 📖

ये चहरे का रंग कविता सा निर्मल है 
ये आंखो की नमी ग़ज़ल सी पाक है 
हाल ए सूरत सब बयां कर देते है ये 
फिर भी उन्हे दिल में राज़ सा लगता है

जीवन एक खुली किताब सा लगता है 📖
हर पलटता पन्ना नया प्रभात सा लगता है

गीतो की सदाएं दिल से निकलती है 
इन किस्सो मे मेरी सांसें ही नहीं 
हमारी रूहं भी बसती है 
यह अध्याय भी उन्हे फ़रेब सा लगता है 

जीवन एक खुली किताब सा लगता है 📖
हर पलटता पन्ना नया प्रभात सा लगता है

 


तारीख: 25.04.2020                                                        राजू राजस्थानी






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