हिंदी भाषा के एक समर्पित साधक डॉ मुल्ला आदम अली पर कविता

ज्ञान की जोत जलाते चले, 

हिंदी के दीप सजाते चले। 

शब्दों के सिपाही, विचारों के राही, 

डॉ. आदम अली हैं साहित्य के पथगामी। 

 

ना सीमाएँ भाषा की रोकीं उन्हें, 

ना पहचान की दीवारें तोड़ीं उन्हें। 

उर्दू की मिठास, हिंदी का रंग, 

उनकी लेखनी में था भारत का संग। 

 

कविता हो, कहानी हो या बाल मन, 

हर विधा में बसता उनका तन-मन। 

शिक्षा के क्षेत्र में बिखेरा उजास, 

बच्चों से बुज़ुर्गों तक पहुँचाया प्रकाश। 

 

हिंदी को दिया उन्होंने नया विस्तार, 

नेट-जेआरएफ तक पहुँचाया उसका संभार। 

ब्लॉग के माध्यम से फैलाई सुगंध, 

ज्ञान की गंगा में स्नान करे जनवृंद। 

 

सरल शब्द, गहन विचार, 

यही है उनके साहित्य का उपहार। 

नमन उस पुरुष को जो हिंदी के लिए जिए,

हर हृदय में जो प्रेरणा का दीप लिए।


तारीख: 25.04.2025                                    डॉ मुल्ला आदम अली




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