
याद तुम मुझे करना याद आऊंगा मैं,
जो भी वादे किए सभी निभाऊंगा मैं
दूर हो गई हो तुम काफी मुझसे,
फिर से तुम्हें वापस लाऊंगा मैं
इन महफिलों की मुझे जरूरत नहीं,
तुझसे ज्यादा कोई खूबसूरत नहीं
मिलना होगा तो कभी भी मिल लूंगा तुमसे,
देखना पड़ेगा मुझे मुहूरत नहीं
रोज़ रोज़ तेरी तस्वीर को निहारता हूं मैं,
लिख कर तुझपे कविता मिटाता हूं मैं
ख्वाइश तो अभी किसी भी चीज की नहीं,
मगर सिर्फ तुझे पाना चाहता हूं मैं
तेरी मज़बूरी को भी समझता हूं मैं,
अब अपना ख्याल कहां रखता हूं मैं
ये महफिलें नहीं पसंद है मुझे,
तेरे ही साथ तो जचता हूं मैं
हर पल तुम्हे चाहूंगा मैं, अर्पित के गीत सुनाऊंगा मैं
तेरे लिए बहुत कुछ कर जाऊंगा मैं
तुझे मेरे हाथों की लकीरों में लिख दें,
भगवान से ये वरदान मांग आऊंगा मैं
एक दिन तुझे अपना सनम कह पाऊंगा मैं।