वो पहली डायरी

अभी अभी तो नादानियां छोड़कर
वो नन्हीं सी समझ मुझमें आयी थी

वो भोली सी समझ वो प्यारी शरारतें
लिखने के लिए ही तो वो पहली डायरी बनायी थी

वो फूलों की महक और सितारों की चमचम से
मैंने अपनी वो डायरी सजायी थी

वो दोस्तों की मस्ती वो टीचर की डाँट
किसी का पहला प्यार तो किसी की मीठी तकरार
सबकी बातें उस डायरी में मैंने लिखकर छिपाई थी

बातों बातों में ये बात मैंने अपने दोस्तों को भी बतायी थी
फिर क्या था पहली बार वो डायरी घर से स्कूल आयी थी
दोस्त तो सारे खास थे इसलिए बारी-बारी से सबको पढ़ाई थी
क्या पता था उस डायरी में टीचर ने भी अपनी नजर गड़ायी थी

बस फिर क्या था टीचर ने बुलाकर अच्छी मार लगायी थी
फिर भी वो डायरी मेरी सबको पसंद आयी थी।


तारीख: 07.04.2020                                                        स्तुति पुरवार






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