आपरेशन ओपेरा-2


हाल ही मे इजराइल खुफिया एजेंसी द्वारा ये दावा किया जा रहा है कि ईरान परमाणु  हथियार विकसित करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है ऐजेंसी ने ये भी चिंता जाहिर की है कि आने वाले दो सालों मे ईरान परमाणु हथियार हांसिल कर सकता है लेकिन ये अरोप किस हद तक सही हैं इस पर कुछ कहा नही जा सकता 

क्योंकि ईरान इस तरह के आरोपों से इंकार करता रहा है उसका कहना है वो इसका इस्तेमाल बिजली उत्पन्न करने जैसे कामों मे करेगा लेकिन इजराइल का इतिहास रहा है वो अपने दुश्मन  की बातों का भरोसा करके हाथ पर हाथ धर के नही बैठता, वो जिसे अपने लियें खतरा समझता है उसे तबाह और बरबाद कर देता है एक ऐसा ही खतरा सन 1980 के दशक मे  उसकी और बढ़ रहा था ये सन अस्सी का दशक था जब इराक की सत्ता पर सद्दाम हुसैन नाम का शासक इराक की गद्दी पर विराजमान था और उसने अपने शासन मे इराक को परमाणु सम्पन्न देश बनाने की सोचा

इसके लियें उसने फ्रांस से मदद मागी, और अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए, इराक के बगदाद  मे (ओसिराक )नामक परमाणु भट्टी का निर्माण किया,जिसमें उसकी फ्रांस ने तकनीकी रूप मे मदद की उधर इसे लेकर इजराइल की चिंताएँ बढ़ती जा रही थीं वो लगातार इराक पर आरोप लगा रहा था की इराक इस भट्टी का निर्माण परमाणु हथियार बनाने के लिए कर रहा है लेकिन इराक और फ्रांस का कहना था ये अरोप गलत हैं वह मानव विकास के लिये ये भट्टी लगा रहा है लेकिन इजराइल कहाँ खामोश बैठने वाला था जब किसी ने उसकी बात नही सुनी तो उसने अकेले ही इराक के परमाणु भट्टी को नष्ट करने का प्लान बनाया और खुफिया जानकारी जुटाने के बाद 7 जून 1981

के दिन एक आपरेशन को अंजाम दिया जिसे आपरेशन (ओपेरा) या आपरेशन बेबीलोन के नाम से जाना जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं इस आपरेशन की खास बात क्या थी, इस आपरेशन की सबसे खास बात थी कि इस आपरेशन मे इजराइल की सहायता उसके वर्तमान दुश्मन (ईरान ) ने की थी माना जाता है ईरान ने ही परमाणु भट्टी (ओसिराक) का नक्शा इजराइल को उपलब्ध कराया था लेकिन आज ऐसा लगता है इजराइल एक बार फिर वही गेम खेलने जा रहा है लेकिन आज उसकी रडार पर इराक नही बल्कि ईरान होगा और उस वक़्त इराक से युद्ध के चलते ईरान इजराइल के पक्ष मे गया था सम्भावित है कि इस बार ईरान का अरबों से मतभेद के चलते अरब देश इजराइल का साथ दें खुलकर ना सही बल्कि अंदर खाने ऐसा कर सकते हैं क्योंकि ईरान के सम्बन्ध अरबों के साथ ज्यादा अच्छे नही हैं फिलहाल ये वक़्त ही बतायेगा लेकिन जिस तरह से इजराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जाहिर कर रहा है सम्भावना है कि आने वाले दिनों मे दुनिया को एक और आपरेशन( ओपेरा-2) देखने को मिले, क्योंकि उस वक़्त इजराइल की किसी ने नही सुनी यहाँ तक के अमेरिका भी खमोश रहा लेकिन इस बार अमेरिका उसके पक्ष मे खड़ा हो सकता है


तारीख: 09.07.2021                                                        मारूफ आलम






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