रंग बदलती होली के कुछ पक्के रंग


होली से तीन दिन पहले से टेसू के फूलों को भिगोकर रखना, गुझिया बनवाने के लिए मुहल्ले भर में न्यौता लगाना कि आज हमारे यहां गुझिया बनेंगी आप आ जाइएगा. दही बड़े,  कांजी का पानी,  भांग की पकौड़ियां छानने की तैयारी करना , कुल मिलाकर यही तो होली थी.


लेकिन बीते कुछ वर्षों से टेसु और गुझिया वाली ये होली न जाने कब हमसे दूर हो गई पता ही नहीं चला.  आज टेसू के फूल के रंग का स्थान सिंथेटिक रंगों ने ले लिया है.  गुझिया, मंगौड़ी और नमकीन अब घर पर नहीं छनती बल्कि बाज़ार से आती हैं. लेकिन होली तो फिर होली ठहरी.


माना कि अपनी होली अब पहले से अधिक आधुनिक हो चली है. अब टेसू और गुझिया वाली होली मैट्रोपालिटन शहरों के रंग में रंगकर नखरीली हो गई है. अब हाईटेक होली वाले वर्चुअल वर्लड में तीन दिन पहले से गुलाल, अबीर, पिचकारी, गुझिया और होलिका दहन के स्टीकर्स,  फोटो और वीडियो शुभकामना संदेश के रूप में आकर फोन की गैलरी को रंगीन बनाकर होली खेलते हैं!


लेकिन शुक्र है कि आज भी बहुत कुछ है जिसे कायम रख कर हम इस पर्व का वही पुराना स्वरूप बरकरार रख सकते हैं.  इसका एक उदाहरण है  हमारे आसपास बिखरी प्रकृति जो अपने रंगों के साथ होली का पर्व पहले की ही भांति मना रही है। प्रकृति के हर कण में आज भी उल्लास छाया हुआ है, कोने-कोने में सुंदर फूल खिले हुए हैं। इतने सारे फूलों के रूप में रंग बिखेर कर भगवान् भी हमें  प्रेरणा दे रहे हैं कि नई प्रसन्नता से अपने जीवन में उमंगों का स्वागत करें।


इस त्यौहार से जुड़ी और भी कई बातें हैं जो हमें याद रखनी चाहिए . जैसे 'बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेहि', 'जो हो ली सो हो ली', अर्थात जो बीत गया उसे भुलाकर अब नई उमंग, और नए उत्साह और नई तरंग से अपने जीवन की शुरुआत करें|


हमें यह बात कभी नहीं भूलनी चाहिए कि होली प्रेम और सौहार्द का पर्व है .
होली के दिन हम सभी न जाने कितने ही नीले, पीले, लाल, चंपई, गुलाबी और हरे रंग एक दूसरे को लगाते हैं | लेकिन ये सभी रंग शाम होते होते ही हमारे तन के छूट जाते हैं | होली के सभी रंगो में एक रंग ऐसा भी होता है जो दिखाई नही देता और वो है प्रेम का रंग | इस रंग को तन पर नहीं मन पर लगाना चाहिए। क्योंकि तन पर लगा हुआ रंग तो छूट जाता है, लेकिन मन पर लगे हुए इस अद्भुत प्रेम का रंग ताउम्र नहीं छूट पाता|


हां इसे हम भक्ति का रंग भी कह सकते हैं क्योंकि प्रेम ही भक्ति है और भक्ति ही प्रेम है। इस रंग से जिसने भी खुद को और दूसरों को रंग लिया फिर उस पर दुनिया का कोई भी दूसरा रंग चढ़ नहीं पाता|

'प्रेम प्रेम सब कोउ कहत, प्रेम न जानत कोई।
जो जन जानै प्रेम तो, मरै जगत क्यों रोई॥'

-रसखान

' रंग भरे मन में होली , जीवन में प्रेम भरे होली । मुस्कान रचे सब अधरन पर, मिल जुल कर सब खेलें होली । गले लगें सब मन मीत बने , रंगों से मन का गीत लिखें । जीवन में मधु संगीत भरें , भूले बिसरों को याद करें । जो संग में थे पिछली होली , रस रंग भरे मन में होली ।'

एक बात हमेशा ध्यान रखिए कि प्रेम के रंग में विशुद्धता रखनी आवश्यक होती है। प्रेम का रंग निर्मल और शुद्ध होता है, होली चाहे कितनी ही आती जाती रहें इसमें मिलावट करने की भूल कभी न कीजिएगा| प्रेम रंग वाली होली केवल दो प्रेमियों के मध्य ही नही खेली जाती, बल्कि ये वो होली है जो हम इस प्रकृति, समाज और पूरी मानव जाति के साथ खेल सकते हैं|

अपने प्रेम रंग से रंगिए इन सबको...
प्रकृति का संरक्षण करने में योगदान दीजिए |
हर होली पर प्रण लीजिए कि समाज को एकसूत्र में पिरोने का हर यथासंभव प्रयास करके रहेंगें |देश, जाति, धर्म,वर्ण सब भूलकर एक दूसरे का सहयोग कीजिये |धर्म -मजहब से ऊपर उठकर केवल प्रेम रंग का प्रचार -प्रसार करें तथा वसुदैव कुटुंबकम की धारणा का महत्व समझें और समझाएं|

समस्त जीव-जंतु, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे... इन सभी के प्रति अपना दायित्व समझें|
तो फिर आइए इस होली, जी भर कर इन  सभी पर अपने प्रेम रंग की बौछार कीजिये |
अबकी होली अपने मन के भीतर प्रेमरंग की ज्योति जलाइए, श्रद्धा का भाव बनाइए, विश्वास की डोर पकडि़ए और प्रेम का रंग चढ़ाइए।
विश्वास कीजिए कि कभी न उतरने वाला ये प्रेम का रंग आप पर जब चढेगा न, तो ताउम्र नहीं उतरने वाला|

क्योंकि इस रंग बदलती होली में भी प्रेम रंग के पक्का होने की गारंटी मेरी रहेगी !


तारीख: 07.04.2020                                                        सुजाता






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