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आर.एस. प्रसन्ना द्वारा निर्देशित 2025 की फिल्म "सितारे ज़मीन पर" भारतीय सिनेमा में एक अनोखी पहल है, जो बॉलीवुड की भावनात्मक गहराई, स्पोर्ट्स ड्रामा की ऊर्जा और सामाजिक संदेश की ताकत को एक साथ जोड़ती है। यह फिल्म आमिर खान की 2007 की क्लासिक "तारे ज़मीन पर" की आध्यात्मिक उत्तराधिकारी है, लेकिन जहां "तारे..." डिस्लेक्सिया जैसे मुद्दे पर केंद्रित थी, वहीं "सितारे..." बौद्धिक विकलांगता (इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी) और सामाजिक स्वीकृति पर रोशनी डालती है। फिल्म की पटकथा दिव्य निधि शर्मा ने लिखी है, जो स्पेनिश फिल्म "चैंपियंस" (2018) का आधिकारिक रीमेक है, लेकिन भारतीय संदर्भ में पूरी तरह से अनुकूलित। फिल्म का बजट लगभग 50 करोड़ रुपये था, और यह आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी है। रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने धमाल मचाया, विश्व स्तर पर 261.93 करोड़ रुपये की कमाई की, जो 2025 की तीसरी सबसे ज्यादा कमाने वाली हिंदी फिल्म बनी। ओपनिंग डे पर 19.50 करोड़, वीकेंड पर 95-96 करोड़, और चार दिनों में 100 करोड़ का आंकड़ा पार किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी सराहना हुई, खासकर अमेरिका, कनाडा और यूके में। थिएटर रन के बाद, यह पहली बड़ी फिल्म बनी जो ओटीटी की बजाय यूट्यूब पर रिलीज हुई, भारत में मात्र 100 रुपये में उपलब्ध। फिल्म न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि विकलांगता के प्रति समाज की सोच बदलने का प्रयास करती है, जो इसे एक महत्वपूर्ण सिनेमाई कृति बनाता है।
फिल्म दिल्ली के एक बदनाम बास्केटबॉल कोच गुलशन अरोड़ा (आमिर खान) की कहानी है, जो एक मैच के दौरान जज के साथ बदसलूकी करने के कारण सामुदायिक सेवा के रूप में बौद्धिक रूप से विकलांग खिलाड़ियों की टीम को ट्रेन करने का काम सौंपा जाता है। शुरुआत में गुलशन इस काम से नफरत करता है, लेकिन धीरे-धीरे टीम के सदस्यों—सतबीर (आरौश दत्ता), गुड्डू (गोपी कृष्णन वर्मा), बंटू (वेदांत शर्मा), हरगोविंद (नमन मिश्रा), शर्माजी (ऋषि शाहनी), राजू (ऋषभ जैन), करीम कुरेशी (सम्वित देसाई), गोलू खान (सिमरन मंगेशकर), लोटस (आयुष भंसाली) और अन्य—से जुड़ता है। प्रत्येक खिलाड़ी की अपनी अनोखी चुनौतियां हैं, जैसे गुड्डू का नहाने से डरना, या गोलू का उत्साह जो टीम को नई ऊर्जा देता है। गुलशन अपनी पत्नी सुनीता (जेनेलिया देशमुख) के साथ व्यक्तिगत जीवन की उलझनों से भी जूझता है, जिसमें उसकी मां प्रीतो (डॉली अहलूवालिया) का परिवार के रसोइये कार्तार पाजी (गुरपाल सिंह) से रोमांस शामिल है। टीम मुंबई में एक बड़े टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई करती है, जहां गुलशन को अपनी लिफ्ट की फोबिया से सामना करना पड़ता है। फाइनल मैच में हार के बावजूद, फिल्म जीत की नई परिभाषा देती है—साहस, दोस्ती और स्वीकृति की। कथानक में कई उपकथाएं हैं, जैसे टीम के सदस्यों की व्यक्तिगत कहानियां, जो फिल्म को बहुस्तरीय बनाती हैं। यह "चैंपियंस" से प्रेरित है, जो अमेरिकी कोच रॉन जोन्स की सच्ची कहानी पर आधारित थी, जहां उन्होंने 1980 के दशक में विकलांग खिलाड़ियों को कोच किया। भारतीय संस्कृति में अनुकूलित, फिल्म दिल्ली की सड़कों, मुंबई की चकाचौंध और घरेलू जीवन को खूबसूरती से दिखाती है।
फिल्म की कास्टिंग इसकी सबसे बड़ी ताकत है, क्योंकि इसमें ज्यादातर न्यूरोडाइवर्जेंट (बौद्धिक रूप से विशेष) कलाकार हैं, जो बॉलीवुड में पहली बार हुआ है। आमिर खान गुलशन के रूप में शानदार हैं—एक घमंडी कोच से संवेदनशील इंसान तक का सफर उन्होंने सूक्ष्म भावनाओं से निभाया है। उनके हास्य के दृश्य, जैसे टीम के साथ पहली ट्रेनिंग, और भावुक मोमेंट्स, जैसे गुड्डू की मदद करना, दर्शकों को बांधते हैं। जेनेलिया देशमुख सुनीता के रूप में लंबे समय बाद स्क्रीन पर लौटी हैं, और उनकी सादगी भरी अभिनय फिल्म की भावनात्मक रीढ़ है। वह गुलशन की सहारा बनती हैं, और उनके दृश्यों में घरेलू हास्य और प्यार का मिश्रण है। टीम के सदस्यों का अभिनय असली है—आरौश दत्ता, गोपी कृष्णन, वेदांत शर्मा, नमन मिश्रा, ऋषि शाहनी, ऋषभ जैन, सम्वित देसाई, सिमरन मंगेशकर और आयुष भंसाली ने अपनी भूमिकाओं को जीवंत किया। ये कलाकार रियल लाइफ में स्पेशल ओलंपिक्स में मेडल जीत चुके हैं, जैसे ऋषि शाहनी ने 1999 में नॉर्थ कैरोलाइना में स्विमिंग में गोल्ड और सिल्वर जीता। डॉली अहलूवालिया और गुरपाल सिंह सहायक भूमिकाओं में चमकते हैं, जबकि ब्रिजेंद्र काला, दीपराज राणा और अन्य छोटे किरदारों में प्रभाव छोड़ते हैं। एक ट्रिविया: फिल्म में दर्शील सफारी का कैमियो है, जो "तारे ज़मीन पर" के ईशान अवस्थी के रूप में दिखते हैं, अब एक वयस्क के तौर पर, जो एक इंस्पायरिंग सीन है। कास्ट की विविधता—हिंदी, तमिल और तेलुगु संस्करणों में—फिल्म की पहुंच को बढ़ाती है।
आर.एस. प्रसन्ना का निर्देशन फिल्म की आत्मा है। वह "शुभ मंगल सावधान" जैसी फिल्मों से जाने जाते हैं, और यहां उन्होंने हास्य और ड्रामा का संतुलन बनाया है। पटकथा दिव्य निधि शर्मा की है, जो मल्टी-लेयर नैरेटिव का इस्तेमाल करती है—टीम की कहानियां, गुलशन का व्यक्तिगत संघर्ष और सामाजिक टिप्पणियां एक साथ चलती हैं। प्रसन्ना ने फिल्म को हैंडहेल्ड कैमरा से शूट किया, जो ट्रेनिंग सेशंस और मैचों में ऊर्जा लाता है। बॉलीवुड की स्पोर्ट्स ट्रेडिशन को उन्होंने रियलिस्टिक रखा, जैसे मैच के दृश्य बिना ओवर-ड्रामेटिक एक्शन के। फिल्म की शूटिंग फरवरी 2024 से जून 2024 तक चली, दिल्ली, मुंबई और वडोदरा में। एक बड़ा ट्रिविया: फिल्म की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक उद्धरण जोड़ा गया, जो सेंसर बोर्ड की मांग पर हुआ, और यह विकलांगता जागरूकता पर है। प्रसन्ना की दृष्टि में विकलांगता को 'सितारों' की तरह चमकदार दिखाना प्रमुख है, जो डायस्पोरा और परिवार की गतिशीलता को छूता है।

जी. श्रीनिवास रेड्डी का छायांकन फिल्म को जीवंत बनाता है। दिल्ली की गलियां, मुंबई के स्टेडियम और घर की अंतरंगता को रंगों से भरपूर दिखाया गया है। मैच के दृश्यों में डायनामिक कैमरा वर्क है, जो खिलाड़ियों की चुनौतियों को हाइलाइट करता है। बारिश के दृश्य या ट्रेनिंग के कंट्रास्ट शॉट्स सामाजिक असमानता दिखाते हैं। लाइटिंग सूक्ष्म है, जो भावनात्मक दृश्यों में गहराई जोड़ती है।
शंकर-एहसान-लॉय का संगीत फिल्म की रिदम है, अमिताभ भट्टाचार्य के बोलों के साथ। गाने जैसे "चैंपियंस का गान", "जीत की उड़ान" और "सितारे चमकेंगे" प्रेरणादायक हैं, जो प्लॉट में फिट हैं। राम संपत का बैकग्राउंड स्कोर मैचों में तनाव और खुशी को बढ़ाता है। एक ट्रिविया: "सितारे ज़मीन पर" टाइटल सॉन्ग "तारे ज़मीन पर" के थीम से प्रेरित है, लेकिन कॉमेडी फ्लेवर के साथ। संगीत विकलांगता के टैबू को छूता है।
चारू श्री रॉय का संपादन तेज है, जो मल्टीपल स्टोरीलाइंस को जोड़ता है। तकनीकी रूप से फिल्म एक्सेसिबल है—क्लोज्ड कैप्शंस, ऑडियो डिस्क्रिप्शन और इंडियन साइन लैंग्वेज के साथ पहली फिल्म। प्रोडक्शन वैल्यू हाई है, आमिर खान प्रोडक्शंस की वजह से। साउंड डिजाइन में खिलाड़ियों की आवाजें भावनाओं को बढ़ाती हैं।
फिल्म क्लास, जेंडर, विकलांगता और जनरेशनल गैप को एक्सप्लोर करती है। अरेंज्ड vs. लव, फोबिया और पैट्रिआर्कल हाइपोक्रिसी प्रमुख हैं। यह परिवार की दोहरी प्रकृति दिखाती है। सांस्कृतिक प्रभाव: फिल्म ने विकलांगता जागरूकता बढ़ाई, और स्पेशल स्क्रीनिंग में स्टैंडिंग ओवेशन मिला। 2025 में इसे अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेट किया गया।
ट्रिविया
• फिल्म स्पेनिश "चैंपियंस" का रीमेक है, जो स्पेन के एडेरस टीम की सच्ची कहानी पर आधारित।
• कई कलाकार रियल लाइफ में स्पेशल ओलंपिक्स मेडलिस्ट हैं।
• शूटिंग के दौरान आमिर खान ने टीम के साथ रियल ट्रेनिंग की, जो बिहाइंड-द-सीन्स वीडियो में दिखा।
• दर्शील सफारी का कैमियो "तारे..." से कनेक्ट करता है।
• फिल्म यूट्यूब पर रिलीज होने वाली पहली बड़ी बॉलीवुड फिल्म है।