मुझे मैकदों की खबर दे,अभी प्यालों को खबर न दे  

मुझे मैकदों की खबर दे,अभी प्यालों को खबर न दे  
मैं खुद को खोना चाहता हूँ ,उजालों की खबर न दे 

उलझ के रह गया गया हूँ ज़माने की रहबरी में ही 
सुलझाने में कुछ वक़्त लगेगा,ख्यालों की खबर न दे 


सो गयी है सारी दुनियादारी,मैं भी सोना चाहता हूँ 
मेरी नींद,मेरे ख़्वाबों को तो नालों* की खबर न दे 

जो मिला है वही बहुत मिला, इसका बहुत शुकून है 
मेरे मिज़ाज़ को दो वक़्त सही,मलालों की खबर न दे 

जो जवाब मिले मुझे तुझसे,बहुत चुभते है आज भी 
मैं अपनी बात तो कह लूँ,नए सवालों की खबर न दे  


तारीख: 07.09.2019                                                        सलिल सरोज






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है