
रातें हैं लंबी, फिर भी जाग रहे हैं लोग।
बैठे हैं शांत, मन भटक रहा है चारों ओर।
ऊपर आसमान में उड़ते ड्रोन,
नीचे गाँव वाले हो रहे बेचैन।
कौन छत पर लेटा ताककर,
कौन बाहर बैठा जागकर।
तकनीक की चादर ओढ़े ये चोर,
डिजिटल आँखों से खोजें ये ठौर।
अब न बचे आँगन, न छत,
ड्रोन से खुल गए रास्तों के रहस्य।
गाँव कहे – "ये कैसा ज़माना आया,
चोर भी उड़नखटोला उड़ाया।"
पर एक दिन ये पकड़े जाएँगे,
न्याय करेगा गाँव-नगर।
सच की लौ जब जल उठेगी,
भाग न पाएँगे ये इस कदर।
ड्रोन का डर भी मिट जाएगा,
जिस दिन ये दल पकड़ा जाएगा।