
ईश्वर का दिया यह सच्चा भेंट,
गन्ने की खुशबू से महके खेत।
गुड़ या शक्कर में ढल जाए,
मीठा गाना हर दिल को भाए।
हर डंठल कहती यह बात,
पसीने की ये है सौगात।
हर खेत में है सपनों का फसल,
गन्ना है श्रम का मीठा फल।
खीर में आए शक्कर का स्वाद,
हर थाली में खुशियों का प्रसाद।
गन्ना जब ऊँचा लहराता,
किसान का दिल भी खिल जाता।
खाद की गंध, पसीने की बूंद,
गन्ने को करती और मज़बूत।
किसान अपने श्रम से प्यार,
गन्ना बना तभी उपहार।
गन्ना कहे — श्रम का फल हूँ,
खुशबू में बसता हर पल हूँ।
कभी खेत, कभी कप में ढलता,
मीठे जीवन का राज बनता।।