कुछ काही कुछ अनकही

जीवन में बातें हैं कुछ कही कुछ अनकही
जो कह दी वो समझ गए, पर जो न कहीं 

वो कौन समझे 


वो अनकही बहुत सुंदर होती है

उसमें दर्द भी है और प्यार भी
वो दिल में छिपी होती है बाहर आती नहीं
ये अनकही डरी, सहमी सी  ढकी रहती है

पर , कुछ कहती नहीं 

उसे कौन समझे 

उस अनकही में खुशी का इजहार भी है 

उम्मीद की किरण भी 

बाहर आने को मचलती है पर 

घबराई हुई सी सिमटी सी  बैठी रहती है 

कुछ कहती नहीं 

उसे कौन समझे 

जीवन में बातें हैं कुछ कही कुछ अनकही
जो कह दी वो समझ गए, पर जो न कहीं 

वो कौन समझे 

 


तारीख: 02.05.2026                                    श्वेता रस्तोगी




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