हजारों भाव एक साथ

 

'डर' तुम्हारी सुरक्षा का,

'विश्वास' तुम्हारे कौशल का।

'प्रार्थना' तुम्हारी सलामती की,

'भरोसा' अपने राम पर।

'चिंता' तुम्हारे स्वास्थ्य की,

'दुःख' तुमसे बिछड़ने का।

'गर्व' तुम्हारी उपलब्धि का,

'अभिमान' तुम्हारी भार्या होने का।

'आनंद' सुरक्षित आगमन का,

'आशंका' कि फिर न चले जाओ।

'पुलकित' रोम-रोम सामने पाकर,

आंखे भर आईं मारे 'खुशी' के।

 

(शुभांशु शुक्ल के वापस आने पर उनकी पत्नी के चेहरे पर आए भाव देखकर लिखी कविता  )


तारीख: 18.07.2025                                    विनय सिंह बैस




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