प्रीत की रीत निभा सजनी

प्रीत की रीत निभा सजनी, ना प्रीत पे दाग़ लगा सजनी।
तुझे प्रीत से मीत बनाने को, किए जतन हज़ार प्रिय सजनी।।

आ तू भी मुझसे नयन मिला, मैं भी आँखें चार करूँ।
तेरी प्रीत में पागल बनकर, मैं पागलपन का इज़हार करूँ।।

नदी किनारे बनके कन्हैया, राधा जैसा प्रेम करूँ।
मेरा हृदय हो जाए तेरा, फिर तेरे ही संग रहूँ।।


तारीख: 18.06.2025                                    महेश शर्मा




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