समानता जरूरी है

आरक्षण

एक शानदार और बेहतरीन व्यवस्था है 

सामाजिक समानता,

सामाजिक न्याय,

सामाजिक गतिशीलता,

सामाजिक विकास,

सामाजिक विविधता,

रूढ़ियों एवं पाखण्डों की समाप्ति,

भेदभाव से सुरक्षा,

आर्थिक विकास,

ऐतिहासिक रूप से वंचित समाजों के उन्नयन,

अवसर की समानता उपलब्ध करवाने का

एवं

गैर-बराबरी की गहरी खाईनुमा दरार को

भरने का एक छोटा-सा प्यारा प्रयास।

 

हाँ, जरा ध्यान दीजिए

अभी एक सरल-सा शब्दसमूह आया है

“ऐतिहासिक रूप से वंचित समाजों का उन्नयन”

जरा इतिहास की घटनाओं पर गौर कीजिए

किस प्रकार भारतवर्ष के भोले-भाले लोगों को,

कुछ क्रूर विदेशी आक्रान्ताओं ने

हमारी भारत-भूमि में प्रवेश करके

बना डाला था पैरों की जूती,

निर्धन,

बेबस,

मजबूर,

बंधुआ मजदूर,

दीन-हीन,

एवं

मानसिक गुलाम।

 

एक ऐसी मानसिक गुलामी

जिसने जन-जन को जबरदस्ती से

जकड़कर जुल्म किये करोड़ों

और इस स्थिति को चिरकाल तक

दृढ़ बनाये रखने के लिए

काली-काली कुत्सित कल्पना करके

रच डाली हजारों काल्पनिक किताबें।

 

अब दौर शुरु होता है

इन कालिमायुक्त किताबों का

मानवता का कत्ल कर दिया,

समाप्ति समानता की करके,

शोषण शास्वत बना दिया,

असमानता,अन्याय और अराजकता

को आधार बनाकर

रचना की गई चार वर्णों की।

 

सर्वश्रेष्ठ और सर्वोत्तम स्वयं को कहकर,

बौद्धिक चतुराई की चाल चली भयंकर

शिक्षा पर एकाधिकार,

तीनों वर्णों पर एकाधिकार,

एक को युद्धों में उलझाया,

दूसरे को व्यापार में,

और तीसरे को अछूत बनाकर

नारकीय जीवन जीने को मजबूर किया

इन आतताइयों ने 

चिरकाल से निरन्तर।

 

सबको डराकर रखने के लिए

पाप-पुण्य, 

स्वर्ग-नरक,

की कल्पित अवधारणाएँ बनाई

और तब जन्म हुआ महादानव धर्म का

उसी धर्म का जिसे शोषण का सबसे बड़ा साधन कहा था

महान साहित्यकार कार्ल मार्क्स ने।

 

 

                          “मारुत”

                  ग्राम+पोस्ट- ढहरिया  

           तहसील- नादौती जिला- करौली

             ( राज.) पिनकोड- 322215

         ईमेल- pavanjrd@gmail.com

 

 


तारीख: 10.01.2026                                    पवन कुमार "मारुत"




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