
आज भी मैं उन गलियों में तुमको ढूंढ़ा करता हूँ,
आज भी मैं उन गलियों में कंचे खेला करता हूँ,
आज भी लगता है कि तुम मुझे पुकारोगे,
किसी न किसी ओट से छुपकर मुझे निहारोगे,
आज भी लगता है कि तुम सामने आओगे,
आज भी लगता है कि मुझको अपनाओगे,
आज भी तुम्हारी मोहब्बत का सजदा किया करता हूँ,
आज भी मैं उन गलियों में तुमको ढूंढ़ा करता हूँ |
हर दीवार पर लिखा तुम्हारा नाम पढ़ा करता हूँ
ख्वाब- ओ - असलियत में तुमको ढूंढ़ा करता हूँ ||
आज भी मोहब्बत का सफर जारी है,
आज भी बरसों बाद चढ़ी वो खुमारी है ||