अकेला मत छोड़ना


अकेला मत छोड़ना मुझे साथ चाहिए
जो दिल को छू लें वह जज़्बात चाहिए


साथ तुम तो यह जिंदगी भी ख़ुशनुमा
अंधेरो को चीरती है मोहब्बतों की शमा
जुबाँ पे एहसासे लव्ज़ की बरसात चाहिए
सर्द न हो नातें, रिश्तों की गर्माहट चाहिए


अधूरे तुम अधूरा मैं एक दूजे के बिना
बने रहें एक दूजे के वजूद का आईना
बफा की सदाएँ होठों पे मुस्कराहट चाहिए
तन्हाइयों में तेरे साथ कि आहट चाहिए
अकेला मत छोड़ना मुझे साथ चाहिए


रात दिन और बदलते मौसम तो क्या
जो न बदले कभी, करें कुछ ऐसा बयां
खट्टी कभी मीठी बने जो वह बात चाहिए
मंजिले ज़ानिब लम्बा सफ़र हाथ चाहिए


जो भी जैसे मिले, वह मिल के बिताएँगे
समय के साथ एक डोर बंधे चले जायेंगे
दोगे साथ सदा वादों की सौगात चाहिए
जो दिल को छू लें वह जज़्बात चाहिए
अकेला मत छोड़ना मुझे साथ चाहिए


तारीख: 06.04.2020                                                        नीरज सक्सेना






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