ए हवा


हवा हवा ए हवा.....
रहें निरंतर तेरा मंद प्रवाह...
लू , मानसून, आंधी, पछुआई ,
वात, मलय, पवन, हवा, पुरवाई
कितने नामों से जग में प्रवाह
सोचता यदि तुम न होती हवा
थम जाते बादल एक जगह
तुम बिन ये बरसात न होती
सुर्य तपिश से जलता तन
यदि मंद पवन साथ न होती
भीनी भीनी महक पुष्प की
तेरे बिन हम्हे ज्ञात न होती
सांस तुम सम्पूर्ण धरा की
अदृश्य किंतु जीवन ज्योति
आक्सीजन का स्रोत तुम्हीं
मनु जीवन योगदान अद्वितीय
सोचूँ तुम न होती यदि हवा
कैसे करते हम जीवन निर्वाह
हवा हवा ए हवा......
रहें निरंतर तेरा मंद प्रवाह


तारीख: 16.10.2019                                                        नीरज सक्सेना






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