दस्तक

दिल के दरवाजे पर दस्तक हुई थी लेकिन, 
हम समझे कि राह भूल पथिक गंतव्य बिसरा गया ।

जादू भरी आँखे छू गयी मन के तार, 
दिल को आहट न हुई कब राही हमराही बन गया ।  

साथ में उनके हर पल, बन गये खूबसूरत लम्हे, 
तन्हाईयों का मौसम सुहाना कर गया । 

आईना अब वही अक्स हमको दिखाता नहीं, 
चेहरे पे उनकी प्रीत का रंग जो चढ़ गया । 

अनकहे न रह जायें कहीं मन के उदगार,
रिश्ता दिल से दिल का तो जुड़ ही गया ।


तारीख: 15.06.2017                                                        भारती जैन






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