इंसान नहीं, आप ईश्वर

 

स्वीकार कीजिए कृतज्ञता,

देशभक्ति की आप पटकथा ।

दिल से आभार,

आप ना मानें हार ।

हर समय कार्यशील,

जैसे पत्थर मील ।

 

करें देश की सेवा,

ना रात, ना दिन देखा ।

आप हैं जैसे सैनिक,

तत्पर और निर्भीक ।

छोड़ परिवार व सुख,

करें देखभाल, भूल ख़ुद ।

आपके अनथक प्रयास,

डालते हममें आस ।

हम होते स्वस्थ,

आपकी मशक्कत ।

 

आप डालते ऊर्जा,

खिले चेहरा मुरझा ।

भावुक आज है मन,

तारीफ़ अनंत, शब्द कम ।

आंखें आज हैं नम,

देख आपका दमखम ।

पानी में जैसे नमक,

जाना आपका महत्व ।

अनगिनत उपकार,

प्रसन्नतापूर्वक उपचार । 

 

भाव से धन्यवाद,

कम पड़ रहे जज़्बात ।

 

आपके बहुत अहसान,

अब तक था अनजान ।

 

शुक्र गुज़ार और गर्व,

आप निभा रहे धर्म ।

नमन करूं हाथ जोड़,

ना आप, तो मैं कमज़ोर ।

आपका योगदान,

ना चाहे प्रमाण ।

लीजिए अभिवादन,

चित्त से अभिनन्दन ।

वैद्य, चिकित्सक, डॉक्टर,

इंसान दिखें, पर ईश्वर...

इंसान दिखें, पर ईश्वर...


तारीख: 25.04.2020                                                        अभिनव






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