कल पूर्णिमा थी,चाँद रात भर जगा होगा

कल पूर्णिमा थी,चाँद रात भर जगा होगा
सूरज की गोद में कुछ देर तो सो लेने दो   1 

हवा जो सोया हुआ है,सफर का थका है
पहली बारिश की दो बूंदों को पी लेने दो    2  

ये तपिश,ये ठिठुरन सभी तो हरजाई  हैं 
मरहूम  फ़िज़ा को थोड़ी देर जी लेने दो      3  

बहुत फासले हैं ज़मीं-आसमां के दरम्यान
क्षितिज पे ही सही दो होंठों को सी लेने दो   4

सारी अदीकतें इंसानों ने ज़ब्त कर रखी है
थोड़ी बहुत साँस तो शज़र को भी  लेने दो   5 


तारीख: 07.04.2020                                                        सलिल सरोज






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