मेरी कहानी

कैसी यह कहानी है
कही नहीं जाती
यह वीरानी जो अब
सही नहीं जाती
यह वह खुशबू है
जो हवाओं में बिखर जानी है
वही सुबह, वही शाम है
तेरे बाद, ये तन्हा सी जिंदगानी है
 


तारीख: 23.06.2024                                    प्रतीक बिसारिया









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