यादों का लॉकडाउन

कई सालों बाद, छत पर
जब कल तुम्हे देखा

सांसें थम सी गई ऐसे
जैसे थमी हुई है
ये दुनिया आजकल

लगा जैसे इशारे से बता रही हो
"अब ट्यूशन नहीं आऊंगी
बात चीत करना भी मुश्किल होगा
मम्मी पूछने लगी हैं"

एक पल में जी गया मैं
10 साल पुरानी वह शाम
जैसे सारी यादें उमड़ कर 
फिर से वापस आ गई हों

दिल को ज़िंदा रखने के लिए
यादों का lockdown ज़रूरी है


तारीख: 12.04.2020                                                        कुणाल






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है