एनिमल

पिता‑पुत्र की गाथा और हिंसा का स्याह संसार

 

मेरे बचपन का एक दोस्त हर बातचीत में अपने पिता का आदर्श रूप प्रस्तुत करता था। वह कहता – “मेरे पापा मेरी दुनिया हैं।” एक दिन उसने बताया कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें अपने पिता से वो प्यार नहीं मिलता, जिसके वे हकदार हैं। यह बात सुनकर मुझे याद आया कि कैसे फिल्मों में अक्सर पिता‑पुत्र के संबंधों को अतिरंजित प्यार या कटु संघर्ष के रूप में दिखाया जाता है। जब मैंने Animal देखी, तो यह एहसास और गहरा हुआ कि अधूरा प्यार किस तरह एक बेटे को हिंसा की ओर धकेल सकता है।

 

कहानी और विषयवस्तु


संदीप रेड्डी वांगा द्वारा निर्देशित यह फिल्म रणविजय ‘विजय’ सिंह नामक युवक की कहानी है, जो अपने पिता बलबीर सिंह (अनिल कपूर) से बेहद लगाव रखता है, पर उन्हें समय नहीं दे पाता। विजय बचपन में एक बेपरवाह, आक्रामक लड़का है। एक दृश्य में वह स्कूल के लड़कों को डराने के लिए पिता की AK‑47 निकाल लाता है और परिणामस्वरूप उसे बोर्डिंग स्कूल भेज दिया जाता है। बचपन में पिता से दूर रहने की यही घटना उसके मन में गुस्सा भर देती है।


वर्षों बाद जब वह लौटता है, तो उसमें हिंसा और विद्रोह की प्रवृत्ति ज्यादा दिखाई देती है। वह कॉलेज में अपनी दोस्त गीता (रश्मिका मंदाना) से शादी कर विदेश चला जाता है, पर अपने पिता के प्रति लगाव कम नहीं होता। फिल्म का मुख्य मोड़ तब आता है जब किसी माफिया गिरोह द्वारा बलबीर सिंह पर जानलेवा हमला होता है और विजय वापस भारत लौटकर बदला लेने की ठानता है। वह अपने पिता के हमलावरों – अबरार और उनके भाईयों – को ढूंढ-ढूंढकर मारता है। मध्यांतर के बाद फिल्म का स्वरूप खुला हिंसा, पारिवारिक व्यामोह और राजनीतिक साज़िशों में बदल जाता है।


कहानी का दूसरा भाग पूर्वजों की विरासत, वंशवाद और पारिवारिक असमानता पर केंद्रित है। विजय को पता चलता है कि उसके पिता और उनके रिश्तेदारों के बीच अतीत में जमीन विवाद और धोखाधड़ी हुई थी। एक अंश में दिखाया गया है कि उसके पिता बलबीर ने एक समय अपने चचेरे भाइयों को धक्का देकर बाहर निकाला था। इन घटनाओं को जानकर विजय का गुस्सा और बढ़ता है। वह सोचता है कि उसका परिवार उसे समझ नहीं पाया और पिता ने उसे हमेशा मजबूर किया। कहानी के अंत में वह अपने पिता के लिए एक विशाल “छोटी सी दुनिया” बनाता है जहां पिता अपने परिवार की सुरक्षा महसूस करें।

 

निर्देशन और अभिनय


संदीप रेड्डी वांगा के निर्देशन में Animal हिंसा, परिवार और प्रतिशोध के त्रिकोण को गहरे रंगों में पेश करती है। वांगा ने पहले अर्जुन रेड्डी और कबीर सिंह जैसी फिल्मों में जटिल पुरुष पात्रों के मनोभाव दिखाए थे; Animal में वे उसी शैली को और भी गहन बनाते हैं। फिल्म की अवधि काफी लंबी है, लेकिन स्क्रीनप्ले ऐसा है कि चरित्रों के व्यवहार को विस्तार से दिखाने का अवसर मिलता है।
रणबीर कपूर ने विजय के रूप में विपरीत भावनाओं को एक साथ जीया – पिता से प्रेम, हिंसा की आग और परिवार को खो देने का भय। उनके अभिनय की सबसे बड़ी खासियत है आंखों में थके हुए गुस्से का स्थायी भाव, जो दिखाता है कि बचपन की कमी उसे किस हद तक प्रभावित करती है। अनिल कपूर अपने किरदार में दृढ़, शक्तिशाली और विडंबना से भरे हैं; उनके और रणबीर के बीच की केमिस्ट्री फिल्म की आत्मा है। बॉबी देओल ने खलनायक अबरार के रूप में सीमित संवादों में ही गहरी छाप छोड़ी। रश्मिका मंदाना का किरदार गीता कुछ हिस्सों में मजबूत, कुछ में द्वंद्वपूर्ण दिखता है, पर उनका अभिनय संतुलित है।

 

संगीत और तकनीकी पहलू


फिल्म में संगीत का इस्तेमाल भावनाओं को बढ़ाने के लिए किया गया है। 'पहले भी मैं' और 'अरजन वेल्ली' जैसे गाने कहानी की गति और माहौल को गहराते हैं। पार्श्व संगीत कई जगहों पर बहुत ऊंचा है, जो कुछ दर्शकों को असुविधाजनक लग सकता है, पर वही तनाव और उन्माद का अंदाज़ भी देता है। रवि वर्मन की सिनेमैटोग्राफी में रंगों का प्रयोग – गहरे लाल, नीले और सुनहरे शेड – हिंसा और विलासिता का माहौल बनाते हैं। संपादन लंबे रन टाइम को संभालने में थोड़ा कमजोर दिखता है, लेकिन क्लाइमेक्स में तेजी लाकर वह कुशलता से विस्फोटक मोड़ देता है।

 

सामाजिक प्रासंगिकता


Animal एक ही परिवार के भीतर स्नेह और क्रोध के टकराव को दर्शाती है। फिल्म हिंसा को ग्लोरिफाई करती दिखती है, जिससे आलोचना भी हुई, पर यह आधुनिक भारतीय परिवारों में भावनात्मक दूरी और पितृसत्ता की उम्मीदों का चित्रण भी करती है। विजय के चरित्र में दिखता है कि अगर परिवार में संवाद की कमी हो और बच्चों के दिल में दर्द दफन हो, तो वह समाज में हिंसक तरीके से प्रकट हो सकता है। फिल्म की महिला पात्र – गीता, विजय की मां, और बहन – पुरुषों की दुनिया में अपनी आवाज़ बनाना चाहती हैं लेकिन फिल्म उन्हीं को पुरुष पात्रों की छाया में छोड़ देती है। यह दर्शाता है कि भारतीय सिनेमा में अभी भी मर्दवाद की आलोचना और स्त्री पात्रों के विकास पर काम बाकी है।

 

पुरस्कार और उपलब्धियाँ


फिल्म ने 2024 के फ़िल्मफ़ेयर और IIFA अवॉर्ड्स में कई नामांकन और पुरस्कार जीते। रणबीर कपूर को फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। अनिल कपूर ने IIFA में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार प्राप्त किया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही और साल 2023 की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्मों में से एक रही।

 

रोचक तथ्य


Animal की शूटिंग भारत, दुबई और स्कॉटलैंड में हुई। फिल्म की अवधि लगभग 3 घंटे 21 मिनट है, जो इसे सदी की लंबी हिंदी फिल्मों में से एक बनाती है। निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने बताया कि उनके पिता के साथ संबंधों ने उन्हें यह कहानी लिखने को प्रेरित किया।
 


तारीख: 06.08.2025                                    Filmy Romeo




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